"सूर्य नमस्कार "
"सूर्य नमस्कार "
आदरणीय “StoryMirror” मंच को नमन के साथ अपनी स्वरचित मौलिक कविता सादर समर्पित !
संदर्भ :---यह कविता सूर्य को केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा, आशा और आध्यात्मिक प्रेरणा के स्रोत के रूप में प्रस्तुत करती है।सूर्य हमें ऊर्जा देता है और उसके बिना जीवन संभव नहीं है। जल, जीवन, जंगल और पर्वत सभी सूर्य के गुणों का बखान करते हैं, जो यह दिखाता है कि सूर्य संपूर्ण प्रकृति का आधार है।
दिनाँक:---31 मार्च 2026
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“सूर्य नमस्कार”डॉ लक्ष्मण झा परिमल================सूर्य के प्रकाश कोरोक कौन सकता हैरोशनी से उसके हीसारा जग चमकता है अंधेरे इस धरती कोउजाला यह करता हैजीवन में फुर्ती कासंदेश यह देता है सूर्य के निकलने काइंतजार लोग करते हैंपक्षी, जीव- जन्तु सारेचहचहाने लगते हैं सुप्रभात बंदन हमलोगों को करते हैंअपने से बुजुर्गों कोप्रणाम हम करते हैं पराती के मधुर धुनगायन हम सुनते हैंपूजा अर्चना मंत्रों सेमंदिर सब निखरते हैं यह देता है ऊर्जा हमें इसके साथ रहते हैंजल,जीवन,जंगल सारे इसके ही गुण गाते हैं !=================डॉ लक्ष्मण झा परिमलदुमका ,झारखंड
