STORYMIRROR

Mukesh Kumar Modi

Abstract Classics Inspirational

4  

Mukesh Kumar Modi

Abstract Classics Inspirational

क्रोधमुक्त ख़ुशीयुक्त

क्रोधमुक्त ख़ुशीयुक्त

1 min
142

रहम नहीं आता खुद पर क्यों करते हो क्रोध

क्रोध करने से हृदय में होगा रक्त का अवरोध


हृदय गति रुक गई तो मृत्यु को तुम पाओगे

क्रोध करके अपना अमूल्य जीवन गँवाओगे


अपने ही रिश्तेदारों से तुम बिछड़ जाओगे

क्रोध रूपी गलती से सबको तुम रुलाओगे


क्रोध नहीं करो तुम प्यार का पथ अपनाओ

खुद भी चलो इस पर औरों को भी चलाओ


आ जायेगी बहारें और हो जाओगे खुशहाल

खुशी रूपी धन से तुम सदा रहोगे मालामाल !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract