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VIVEK ROUSHAN

Abstract


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VIVEK ROUSHAN

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चलना जरुरी है

चलना जरुरी है

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कई मुश्किलें हैं राहों में पर चलना जरुरी है 

मेरे इस जख्म-ए-दिल को अब भरना जरुरी है


मेरी हर खुशी तुम्हीं से थी ये गम भी तुम्हीं से है

इस गम-ए-हिज़्र के साथ हीं अब बहना जरुरी है


तेरी फ़िक्र ने याद ने ख्याल ने दर्द हीं दिया मुझे

तेरे फ़िक्र-ओ-ख्याल से अब निकलना जरुरी है 


बहुत रो लिए भटक लिए हम रेजा-रेजा हो लिए

उस हिज़्र माह-ओ-साल को अब भूलना जरुरी है


जरुरी है की मैं तुझसे राब्ता हर वास्ता तोड़ दूँ

सफर-ए-मंज़िल-ए-सदा को अब सुनना जरुरी है।


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