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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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किस किस को

किस किस को

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किस किस को छोडूं ,

किस किस को पकड़ू,

किसको कहूं अपना ,

किसको कहूं पराया ।


किस किस को समझूं,

किस किस को समझाऊं,

किस किस को अपना ,

दिल खोलकर दिखाऊं,।


किस किस से करे प्रेम,

किस किस से करें नफरत,

यहां सबकी होती है ,

अपनी अपनी फितरत,।


किस किस को देखे,

किस किस को ना देखे,

सभी तो मेरी नजरों में,

एक से हैं लगते,।



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