STORYMIRROR

Neerja Sharma

Tragedy

3  

Neerja Sharma

Tragedy

अंजान सफर

अंजान सफर

1 min
276

अंजान सफर 

नई डगर 

न संगी 

न साथी 

जाऊँ किधर !


निहारू राह 

जाने की चाह

मिल जाए कोई 

बढ़ जाऊँ आगे

हो बेपरवाह।


घिरते बादल

कड़की बिजली 

धड़के दिल 

जाऊँ किधर 

अंजान सफर।


प्रभु आस 

मिले साथ 

डर हो दूर 

कट जाए 

अंजान सफर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy