Neerja Sharma
Action Inspirational Thriller
धरती हमारी माता है
इससे अटूट नाता है।
इसकी सुरक्षा धर्म हमारा
इसकी सेवा कर्तव्य हमारा।
हरा भरा हम बनाएँगे
प्रदूषण मुक्त रखेंगे।
नेत्र कलम
एहसास
रक्षाबंधन -मे...
रानी लक्ष्मीब...
खाली हाथ
सुखी परिवार
अवकाश (पंजाबी...
हमारी पृथ्वी
धरती माँ
समय
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
कल-कारखाने रचे उजाड़ जंगल, वन्य प्राणियों को आश्रयहीन किया। कल-कारखाने रचे उजाड़ जंगल, वन्य प्राणियों को आश्रयहीन किया।
अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं। अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।
अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है, अंजान है मन उन सारे प्रयासों से जो हर पल सिर्फ एक ही ओर नज़र बनाएं रखता है,
राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी। राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी।
मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे के सर आयी, मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे क...
माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर। माँ भारती की सीमा-औ-सम्मान-सुरक्षा पर, ये सदैव शीश अर्पण को तत्पर।
सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों का मतलब और मकसद ही ... सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों...
ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा, ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा,
ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे
नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे। नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे।
यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है। यह कविता शहीदो को सलामी दे रही है।
अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान, अपनों की चिंता छोड़कर वो तो बचाते कितनों की जान,
इनके बच्चे मासूम कितने, मिलते हैं नन्हे भोले-भाले, तरस खा लेना ओ भगवान, कहलाते तुम इनके बच्चे मासूम कितने, मिलते हैं नन्हे भोले-भाले, तरस खा लेना ओ भगवान, ...
जब मैं घर से निकल कर आया, भारत माता की सौगंध भी तो खाया जब मैं घर से निकल कर आया, भारत माता की सौगंध भी तो खाया
सारा ही जीवन बेकार है, बिना ही प्यार के, सारा संसार भी तो बेकार है, बिना ही प्यार के सारा ही जीवन बेकार है, बिना ही प्यार के, सारा संसार भी तो बेकार है, बिना ही प...
स्त्री कि कोई परिभाषा नहीं है, क्योंकि स्त्री खुद एक परिभाषा है। स्त्री कि कोई परिभाषा नहीं है, क्योंकि स्त्री खुद एक परिभाषा है।
पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया। पीपल का हूँ वृक्ष अभागा सूखे नयनन कृश है काया।
आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी। आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी।
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।