आओ मिलकर खाएं एक कसम
आओ मिलकर खाएं एक कसम
आओ मिलकर खाएं
खाएं एक कसम
अपनों को नहीं भेजेंगे
कहां
नहीं भेजेंगे वृद्ध आश्रम
मां के आंचल को नहीं हटने देना सिर से
मां ममता की मूरत है मैं तुम्हें बताऊं फिर से
हमें कोख मै दी है जगह
इस देवी को नमन
अपनों को नहीं भेजेंगे
नहीं भेजेंगे वृद्ध आश्रम
मां दूध से हमें सीचती है
पिता का हमको खून मिला
प्रसव पीड़ा सहकर उसने
फिर भी हम को दीया जन्म
अपनों को नहीं भेजेंगे
नहीं भेजेंगे वृद्ध आश्रम
स्तनपान करवाया गोदी में झुलाया
पिता से भी हमने प्यार बहुत पाया
सिर पर अपने रहती है हिमालय की छत्रछाया
फिर करती हैं संतान क्यों इतने छोटे कर्म
अपनों को नहीं भेजेंगे
नहीं भेजेंगे वृद्ध आश्रम
घुट घुट कर रोते हैं उम्मीद नहीं खाते है
खुली आंखों में भी सपने होते हैं
अपना के इंतजार में राहे जोहते हैं
पत्थर दिल संतान ले आओ अपनों को
कर लो थोड़ी शर्म
अपनों को नहीं भेजेंगे
नहीं भेजेंगे वृद्ध आश्रम।
