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Surendra kumar singh

Romance


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Surendra kumar singh

Romance


आ जाओ प्रिये

आ जाओ प्रिये

1 min 17 1 min 17

शब्द पंक्षी उड़ चले हैं

बह रही शीतल हवायें

रौशनी का गीत सुनने

तुम भी आ जाओ प्रिये।


फूल के सूखे अधर पर

नव किरण सजने लगी है

विबिध रँगी बून्द झरकर

पंखुरी रंगने लगी है


स्वर लहर से चल पड़े है

नाचती सारी दिशाएँ

डूबते परिवेश के यहसास करने

तुम भी आ जाओ प्रिये।


पुष्प बृक्षों के शिखर पर

गन्ध लतिका हंस रही है

लहर इसका आचमन कर

गुनगुनाती उठ रही है


प्रेम पंथी चल पड़े हैं

मोहती इनकी अदायें

नह की झंकार सुनने

तुम भी आ जाओ प्रिये।


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