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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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तुम्हारा होना

तुम्हारा होना

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तुम्हारा होना
 मेरे लिए सौंदर्य का
 होना भर नहीं है
 एक अलौकिक शक्ति का
लौकिक व्यवहार में सक्रिय होना भी है।
 जीवन के अंतरिक अवयवों
जैसे मन
 मस्तिष्क
हृदय
 को तुम्हारे रंग में रंग उठना भी है।
 वायु का शुद्ध होने के लिए मचलना भी है
 पृथ्वी के बढ़ते तापमान
और अनियंत्रित मौसम को
 जीवन के अनुरूप संगठित करना भी है।


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