एक पल
एक पल
एक पल जीवन के साथ,
गुजरना
जाने कितने अनुभवों के
इंद्रधनुष से
आत्मसात हो जाना
होता है
कि पूछिए मत।
बात अवधारणा की नहीं है
जीत हार की नहीं है
ये तो सब्जेक्ट है
अनुभव सब्जेक्ट नहीं
ऑब्जेक्ट है।
अब अगर दुनिया में चल रहे
विध्वंस युद्ध
से रूबरू हों
और ऐसा लगे
क्या पता
एक शक्तिशाली बम
मेरे ही ऊपर गिरे
कांप जाता है
अस्तित्व अपना
हालांकि यह एक संभावना है
और अगर गिर जाए
तो फिर
उन अनुभवो को शेयर करने के लिए
मै उपलब्ध नहीं रहूंगा।
फिर भी युद्ध से ज्यादा
युद्ध के उन्माद का
अनुभव तो हो ही रहा है
अभी इस पल में
जीवन के साथ।
ये बात अलग है प्रकृति परमात्मा ने
मुझे लिया हुआ है
अपने आगोश में।
