STORYMIRROR

Neeraj pal

Abstract

4  

Neeraj pal

Abstract

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
633

आंसू बहा-बहा के अपने दिलबर की याद में हम रोए।

सूने पन की हर घड़ी में तुम्हारी हर बात पर हम रोए।।


वफा की बात पर रोए जफा की बात पर भी रोए।

मत पूछो यारों रात भर किस बात पर हम रोए।।


बिताए जो लम्हे मिलकर उन हसीन पल पर हम रोए।

फिर कभी वो पल मिलेंगे यह सोच कर हम रोए।।


जगाई जो रोशनी तुमने उस कीमती सौगात पर हम रोए।

संभल कर कहीं गिर न पड़े इस बात पर हम रोए।।


सिवाय एक धोखा है जिंदगी और कुछ नहीं है "नीरज"।

लिखे जो गीत दिल से उन नगमात पर हम रोए।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract