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Kanchan Prabha

Classics

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Kanchan Prabha

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नारी तेरे कितने रूप

नारी तेरे कितने रूप

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नारी त्याग की मूरत तू

नारी दया की सूरत तू

नारी तुझमे माँ की ममता 

मोती जैसा प्रेम है झड़ता


नारी तुझमे बहन का प्यार 

गर्मी में लगे ठंडी ब्यार

नारी तुम घटा घनघोर

बादल में हो पवन का शोर


नारी तुम ही शुप्रभात 

नारी तुम ही काली रात

नारी के हैं कितने रूप

नारी छाया नारी धूप


नारी प्रेम प्रणय का बंधन

कभी झाड़ी कभी हो उपवन

नारी होऊँ मैं हर जन्म

नारी तम्हें सत सत नमन।


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