STORYMIRROR

Anita Sharma

Abstract Classics

4  

Anita Sharma

Abstract Classics

रंग-उत्सव

रंग-उत्सव

1 min
246

फाल्गुन में नयी

कोपलों का उपहार

शाश्वत प्रकृति पर

छा गयी सतरंगी फुहार

गोपियाँ भी करने चलीं


कान्हा से मान मनुहार

रंग और गुलाल लिए

रंगीले सब हैं तैयार

देखो आ ही गया

होली का त्योहार


मस्तानो की टोली निकली

करके रंगों का श्रृंगार

ढोल नगाड़े बजा बजाकर

गायें सब गीत मल्हार


प्रेम के रंग में डूबे मतवाले

बाँटे खुशियों का अम्बार

देखो आ ही गया

होली का त्योहार


सब भेदभाव भूलकर

मिटाकर मन के गुबार

घोल दो मिठास एक-दूजे में

कर लो प्यार बेशूमार 

यही संस्कृति है हमारी


यही है जीवन का आधार

दहन हो कुत्सित विचारों का

रहे साँझा हर परिवार

देखो आ ही गया

होली का त्योहार।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract