शाम..
शाम..
समा आज भी वही है
शाम तेरी याद महीन
और हम बेबस यूं ही ..
उफ ये तेरी मोहब्बत जान ले लेगी मेरी !
समा आज भी वही है
दूर असामाँ मे चाँद अधूरा सा
चाँदनी के लिये तरसे
उफ यह मोहब्बत तेरी जान ले लेगी मेरी!!
समा आज भी वही है
रात की गहराई पलकों तले हैं
बहती नदिया जैसे आंसुओं की,
यादें भी तेरी दीवानगी भरी हैं
उफ ये मोहब्बत तेरी जान ले लेगी मेरी ..!!!
समा वही रहेगा उम्र भर
तेरी याद में पागल दिल भी,
तुम कहो बेवफा कोई गम नहीं
दिलो दिमाग़ पर तुम्हारी मर्जी है ..
उफ ये मोहब्बत तेरी जान ले लेगी मेरी!!!!

