STORYMIRROR

sarika k Aiwale

Romance Tragedy Inspirational

4  

sarika k Aiwale

Romance Tragedy Inspirational

शायरी

शायरी

1 min
512

बीती हर वादी को गले लगा लेते हो 

बीती पल मैं जिंदगी जी लिया करते हो 

बिना किसी वजह जो मिली सजा से पुछो 

बिना कुछ कहे वो कैसे मुस्कुरा लेती हो 


ना जाने किस जख्म का इलाजे रहम करती हो 

हर गुजरी फिजा मैं की यादे संजोये रखते हो 

बस इतनी गल है 

बीती हर गली से वास्ता क्यो पूछते हो 

गुजरी वह राह से इनायते तोबा कर लिया जो 

फिर उन्ही आहटों से अस्क का वजुद क्यो पूछते हो 


अपनी थी वो गालियाँ छूट चली

हथेली से नसीब की रेखा मिट चली 

कुछ कहने से क्या रुक जाती वह 

एक बार जिंदगी जो नसीब से रुठ चली।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance