Pawan Gupta

Horror Tragedy Thriller


4.3  

Pawan Gupta

Horror Tragedy Thriller


समुद्र के किनारे

समुद्र के किनारे

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आज सुबह सुबह ही शोर होने लगा, हम घूमने जायेंगे। हम घूमने जायेंगे, मेरी पत्नी राधिका बेटा रोहन और बेटी नैन्सी तीनो को मैंने वादा किया था कि अगले संडे में तुम सबको समुद्र किनारे (बीच) पर घूमने ले चलूँगा !।

आज संडे है नास्ता करने के बाद से ही तीनो शोर मचा रहे हे, आज समुद्र किनारे घूमने जाना है, पार्टी करनी है, मज़े करने है,यही शोर हो रहा था,

ओके। बाबा ओके। शाम ४ बजे तैयार रहना में सबको समुन्द्र के किनारे (बीच) पर ले चलूँगा, पर वहा शरारत मत करना ( मैंने उन लोगो से कहा) 

रोहन-इतनी टेंशन मत किया करो। बच्चे मस्ती नहीं करेंगे तो कैसे काम चलेगा। फिर भी फ़िक्र मत करो। हम ज्यादा शरारत नहीं करेंगे,

मैंने कहा। ठीक है जाने से पहले सब अपना अपना होम वर्क ख़तम कर लो,

वहां जाने से पहले, और राधिका ( पत्नी ) से कहा कि हम शाम घूमने जा रहे है तो कुछ स्नेक्स बना लेना, अच्छा रहेगा !

सब तैयारी हो गयी,हम शाम को घूमने के लिए निकल गए लगभग ४ बजे घर से निकले थे, ४। ३० तक हम समुन्द्र के किनारे पहुंच गए, सब बहुत खुश थे ! 

मैंने रोहन और नैन्सी से कहा ज्यादा दूर मत जाना ठीक है न ! दोनों ने कहा ओके पापा,

समुन्द्र के किनारे (बीच) पर बहुत भीड़ थी, मैं राधिका के साथ हाथो में हाथ डाले समुन्द्र के लेहरो पर टहल रहे थे, और रोहन और नैन्सी वही थोड़ी दुरी पर रेत के घर बना-बना कर खेल रहे थे, 

सूरज सुर्ख लाल था। ऐसा नजारा था कि मानो सूरज बदलो की गोद से निकल कर समुन्द्र के आग़ोश में चला जा रहा हो। अब सूरज की गर्मी शीतल होती जा रही थी, 

धीरे धीरे लोग भी वापस जाने लगे थे, समुन्द्र के किनारे (बीच) पर बहुत से फेरी वाले खिलोने वाले सब घूम रहे थे,

हम सबने अपना लाया स्नेक्स खा लिया था,शाम खत्म होने लगी तो हम भी घर की और चल दिए,

घर लगभग 8बजे पहुंचे।ओह, सब थक चुके थे, कुछ खाने का भी मन नहीं था। तो हम सबने एक एक गिलास दूध और केले खाकर सोने चले गए !

अचानक रात के २ बजे नैन्सी और रोहन बहुत तेज चीखे, रोहन और नैन्सी अपने रूम में सोते थे, और हम अपने रूम में जब हमने दोनों की चीख सुनी तो हम उनके रूम की ओर भागे !

उनके कमरे का गेट खोलते ही वो हमसे आ कर लिपट गए रोते हुए बोले, कि माँ कुछ अजीब लग रहा है,रूम में शायद कोई है !

हमने दोनों को संभाला और कहा बेटा कोई नहीं है चलो चेक कर लेते है फिर हम उस रूम को चेक करने लगे उस रूम की खिड़की भी अच्छे से बंद थी, तो हमने बच्चो को समझाया कि डरो मत ये सब बहम है जाओ सो जाओ, और फिर दोनों बच्चो को सुलाकर हम भी सोने चले गए !

सुबह सब लेट जगे मैं फटाफट ऑफिस चला गया पर बच्चो ने आज स्कूल की छुट्टी कर ली, सबने पुरे दिन मस्ती की !

जब मैं ऑफिस से आया तो राधिका चाय ले कर आयी, और बच्चे मेरे पास ही थे, आपस मैं कुछ बाते कर रहे थे। मैंने चाय पीते हुए रोहन नैंसी क्या बात कर रहे हो बेटा ! आज क्या किया तुम लोगो ने,

नैंसी-पापा पापा हमने नए खिलोने से बहुत खेला नया खिलौना बहुत अच्छा है। पापा 

मैंने कहा-नया खिलौना कौन सा खिलौना। । । मम्मी ने खरीदवाया है क्या !

रोहन-नहीं पापा कल समुन्द्र के किनारे (बीच) पर मिला जब हम रेत का घर बनाकर खेल रहे थे, तभी मिला !

मैंने कहा - क्या। तुम लोगो ने ये बात कल क्यों नहीं बताया कोई भी चीज़ ऐसे किसी भी जगहे से नहीं उठा के लाते है, कितनी बार समझाया है !

"राधिका तुमने भी नहीं बताया कुछ "

राधिका-मुझे कहा पता था,मुझे भी अभी पता चला है, मैंने रोहन और नैन्सी को पास बुलाकर समझाया कि ऐसे कोई भी चीज़ बहार की नहीं लेनी चाहिए, हमें पता नहीं होता कि किस चीज़ में बम हैं या कोई बैक्ट्रिया या कोई और चीज़, ऐसी अनजान चीज़ो से हम खतरे में पड़ सकते है ! 

वैसे ये तो दिखाओ कौन सा खिलौना लाये हो !

रोहन- अभी दिखाता हू पापा । । कहकर रूम में चला गया और जल्दी से एक खिलौना ले आया !

ये खिलौना नहीं पृथ्वी का बना ग्लोव था। जिसपे सारे देश बने हुए थे, और उसपर तीन फ्लैग लगे हुए थे,जिसके निचे मैगनेट (चुम्बक) लगे हुए थे,और ये ग्लोब मेटल (लोहे) का बना हुआ था !

तीनो फ़्लैग उससे चिपके हुए थे। ये फ्लैग पीला हरा लाल तीन रंग के थे,अब ये तो नहीं पता की ये क्या था,कोई खिलौना या मैप ।

पर कुछ भी हो इसे घर में रखना ठीक नहीं लग रहा था, पर इससे कोई हानि भी नहीं हुई थी तो मैंने बच्चो को समझा के छोड़ दिया !

मैंने कहा रख लो इसे पर आगे से कोई भी सामान बहार की मत लाना,वादा करो !

दोनों ने इस बात का प्रॉमिस किया कि आगे से वो दोनों ऐसा दोबारा नहीं करेंगे,जिंदगी नार्मल चल रही थी कि एक दिन राधिका का कॉल आया वो बहुत डरी हुयी थी !

हेलो। हेलो। एजी। एजी। । । सुनते हो मुझे बहुत डर लग रहा है आप प्लीज जल्दी घर आ जाओ, 

मैंने कई बार पूछा आखिर क्या बात है राधिका । पर उसने कुछ नहीं बोला बस रोते हुए बोलती रही आप जल्दी आ जाओ बस !

 मैं भी ऑफिस से छुट्टी लेकर जल्दी से घर पंहुचा,घर पर राधिका ने बताया की रोहन के कमरे से जोर जोर से हसने की आवाज आ रही थी, तो मैं देखने गयी !

 मैंने देखा रोहन और नैन्सी के अलावा भी तीसरा कोई और था ! वो तीनो उस ग्लोब में खेल रहे थे, नैन्सी की आवाज आयी कि ये ग्रीन फ्लैग मेरा है, रोहन ने कहा येलो फ्लैग मेरा हैं तभी तीसरे बारी की आवाज आयी ये रेड फ्लैग मेरा है , और फिर तीनो तेज़ तेज़ हसने लगे !

मैंने देखा वो ग्लोब हवा में लटक रहा था, प्लीज कुछ कीजिये, ये सब क्या हो रहा है !

।राधिका को बहुत समझाया शांत किया की चलो देखते हे फिर आगे कुछ करेंगे !

मैं राधिका को लेके रोहन नैन्सी के रूम मैं लेके गया,और रोहन से पूछा-रोहन ये सब क्या चल रहा है,कोई मुझे समझाएगा !

रोहन चुप रहा नैन्सी बोली पापा वो हमारा दोस्त हैं और वो हमारे साथ ग्लोब के साथ आया था,उसी के साथ हम खेलते हैं पर अब वो माँ से गुस्सा हो गया है,क्युकी माँ ने उसे देख लिया हैं। और शोर मचाने लगी है !

मैंने दोनों बच्चो को डाटते हुए, ये सब क्या लगा रखा है,तुम दोनों ने यहाँ कोई मज़ाक चल रहा है, क्या कुछ भी बोलते जा रहे हो !


ये ग्लोब ही इन सबकी जड़ है न, इधर लेके आओ उसे !

बस मैंने इतना ही बोला था कि रोहन की तेज आवाज आई नहीं पापा है मेरे ! और एक फ्लावर वाश आकर मेरे सर से टकराया और मेरे सर से खून निकलने लगा !

ये सब राधिका देखकर बहुत तेज चिल्लाई और बच्चे भी डर गए,मैं तो सदमे में था कि ये सब क्या हो रहा है,अपना सर किसी कपडे से दबाये सबको लेकर उस कमरे से बहार की तरफ भागा और उस कमरे को लॉक कर दिया !

सब लोग अब पुरे घर को बंद करके बहार आ गए और कार में बैठ कर पहले अस्पताल गए !

कार राधिका ही चला रही थी,मेरा खून बंद नहीं हो रहा था,मैंने खून को रोकने के लिए कपडे से सर को दबा रखा था,जिसके कारण वो कपडा पूरा खून से गीला हो गया था,अब मुझे नींद सी आने लगी शायद मैं बेहोश हो रहा था !

मुझे तीन घंटे बाद होश आया,मेरे सर की पट्टी हो गई थी, सब पास ही थे,फिर राधिका ने बताया कि उसने सबको फ़ोन क़र दिया है और अपनी माँ को ये सारी बातें भी बता दी है,माँ किसी पंडित जी को जानती है,जो झाड़ फूक करते है,माँ उन्हें लेकर आ रही है !

मैंने कहा - अच्छा किया राधिका ये सब बहुत खतरनाक है,मुझे लगा था कि बच्चे शरारत कर रहे है,पर अब मुझे विस्वास हो गया है कि कोई आत्मा ये सब कर रही है !

और ये कोई पंडित या तांत्रिक ही ठीक कर सकता है !

अगले एक घंटे में मेरे बड़े भाई भाभी,राधिका के मम्मी पापा पंडित जी सब अस्पताल में आ गए !

राधिका ने सारी बात उनको बताई,अगले दिन मुझे डिस्चार्ज क़र दिया गया ! मैं भैया और राधिका के पापा पंडित जी हम सब मिलकर मेरे घर पर गए, और बच्चो और सभी लेडीज को भैया के घर भेज दिया गया,हमने उनसे कह दिया कि सब ठीक करके हम भी वही आ जायेंगे !

 हम अपने घर लगभग १२ बजे दोपहर में पहुंचे,पंडित जी सबसे आगे थे,उन्होंने पहले घर पर गंगा जल छिड़का फिर दरवाजा खोलकर अंदर कदम रखे !

दूसरा कदम रखते ही सारा सामान इधर से उधर होने लगा पंडित जी ने मन्त्र पढ़ते हुए अंदर घुस गए,कुछ ही देर में ये सब सामान का फेकना बंद हो गया तो हम भी घर के अंदर आ गए !

पंडित जी को मैंने बताया कि ये वाला रूम ही रोहन और नैन्सी का है,इसी कमरे में वो खिलौना (गलोब) है,पंडित जी ने फिर कोई मन्त्र पढ़ते हुए उस कमरे पर गंगा जल छिड़का, तभी अंदर से गुर्राने की आवाज आई,और कमरे के अंदर सब उथल पुथल होने लगा !

पंडित जी अपने मंत्रो को पढ़ते रहे,उस कमरे में से कभी चीख तो कभी गुर्राने की आवाज़ आती रही, फिर सब शांत हो गया !

पंडित जी ने उस कमरे का दरवाजा खोलने से पहले हमसे बोले की देखो आप लोग मेरे पीछे ही रहना और जब मैं आपसे कहुँ तब ये गंगा जल और मंत्रो से बाँधी गई इस सफ़ेद चादर को उसके ऊपर डाल देना क्युकी वो अपने मन से गायब और प्रगट हो सकता है,पर ये चादर उसके ऊपर रहेगा तो वो असहाय हो जायेगा फिर हम उसे वश में कर सकते है,हम समझ गए थे कि हमें क्या करना है !

मैंने और भैया ने वो चादर लेकर पंडित जी के पीछे - पीछे चलने लगे,अंदर जाते ही जोर - जोर से हसने की आवाज आने लगी,पंडित जी ने भी अपने मंत्रो का उच्चारण तेज कर दिया,और घर में चारो तरफ गंगा जल के छींटे मारने लगे,तभी हमारे सामने उस लड़के का अस्तित्व दिखा,पंडित जी ने तुरंत बोला ये चादर उसपे डाल दो,हमने तुरंत जाकर वो चादर उस लड़के पर डाल कर पंडित जी के पीछे भाग आये,अब वो लड़का पूरी तरह से उस चादर से ढाका हुआ दिख रहा था !

पंडित जी ने कहा " डरो मत अब ये कुछ नहीं कर पायेगा,बस चिल्ला सकता है,तड़प सकता है,उसके बाद पंडित जी ने मुझसे वो ग्लोब माँगा !

जैसे ही ग्लोब पंडित जी के पास गया वो लड़का चीखने चिल्लाने लगा,मुझे छोड़ दो मैं चला जाऊंगा, पर पंडित जी ने उसकी एक न सुनी और उस ग्लोब को उसके तीनो फ्लैग के साथ - साथ जला दिया,उस ग्लोब के साथ - साथ वो चादर भी जल उठा,लगभग 30 मिनट तक जलते जलते सब शांत हो गया !

उस घर में फिर से पहले की तरह शांति फ़ैल गई !

उसके बाद पंडित जी ने उस ग्लोब और चादर की राख़ को अपने साथ ले जाकर गंगा नदी में मंत्रो के साथ प्रवाहित कर दिए,और उसके बाद हम सब भैया के घर गए,हमने सारी बातें भाभी,राधिका और मम्मी जी को बताये, बच्चे भी डरे हुए थे !

 हमने पंडित जी को धन्यवाद् कहा और दच्छिणा देना चाहा पर उन्होंने नहीं लिया कहा इस पैसे से भूखे को खाना खिला देना,और ये कहकर वो यहाँ से चले गए !

 राधिका के मम्मी पापा भी अपने घर चले गए,और हम भी अपने घर वापस आ गए !

घर का बहुत बुरा हाल था,सब ठीक किया हमने और फिर हम नार्मल जिंदगी जीने लगे।

।इस घटना से हमारे बच्चो को एक सबक तो मिल गई, कि इस तरह कोई भी चीज न ही उठानी चाहिए और ना ही उसे घर लाना चाहिए ।


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