Pawan Gupta

Horror Tragedy Thriller


4.4  

Pawan Gupta

Horror Tragedy Thriller


भिखारी बाबा 3 (वो कौन थी )

भिखारी बाबा 3 (वो कौन थी )

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अब मुझे अच्छी नींद आती थी, पूरी रात सोता था कोई भी परेशानी नहीं होती थी, मेरे अगले तीन दिन बहुत अच्छे बीते। रोज ऑफ़िस जाना ऑफ़िस से घर आकर सारे काम निपटना खाना बनाना और फिर खा पी कर आराम से सो जाना। डर जैसी कोई बात लगती थी नहीं थी ...ठीक रविवार के दिन से ३ दिन बाद बृस्पतिवार की रात को कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद कभी नहीं की थी।


उस रात भी मैं नोर्मली खा पी कर सो गया था, उस रात मौसम बहुत ख़राब था, हवाएँ तेज चल रही थी, और बिजली भी कड़क रही थी बारिश होने के आसार नज़र आ रहे थे। मैं तो आराम से सो गया, पर रात करीब करीब २ बजे होंगे, मेरी नींद किसी आवाज़ को सुन कर खुली। मुझे किसी के सिसकने की आवाज़ आई, मेरे मन में फिर से डर ने अपनी जगह बना ली, फिर भी हिम्मत करके उठा, लाइट जलने गया पर लाइट थी ही नहीं। मौसम के ख़राब होने के कारण लाइट कट गई थी, मैंने फ़ोन की लाइट जला कर मोमबत्ती ढूंढने लगा, मोमबत्ती लेकर उसे जलाया और उसे कमरे में रख दिया। उसके बाद मैंने ध्यान दिया की ये सिसकने की आवाज़ किचन से आ रही थी तो मैं अपनी फ़ोन की लाइट लेकर मैं किचन में देखने गया।

मैंने किचन में धीरे से झांक कर देखा, मेरी तो दिल की धड़कन तेज़ हो गई, हाथ पैर कांपने लगे, ....हे भगवान फिर से....मैं डर के मारे मन ही मन भगवान को याद करने लगा।


वहां 16 साल की एक लड़की दीवार से अपने शरीर को टेक लगाकर बैठी हूँ ई थी, उसका सर नीचे था, उसके बाल उसके चेहरे से नीचे आ रहे थे ,उसने अपना सर अपने घुटनों पर टेक रखा था और सिसक सिसक कर धीरे धीरे रो रही थी। जब मैंने दूर से किचन में झांक कर देखा तो यही नज़ारा दिखा, ये देखकर मेरा तो हार्ट अटैक आने को था, पर मैं हार्ट पेशन्ट ना होने के कारण बच गया। अब ऐसी हालत में मैं क्या करूँ और क्या नहीं ....कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था, फिर मैंने दिमाग को शांत करके सोचा डर डर कर कुछ नहीं होगा। अब तक मैंने बहुत पैसे खर्च कर दिए है, और बहुत सारा उधर भी अमित से ले चुका हूँ, सिर्फ ३००० तो पंडित ले गया, तब भी ये सब हो रहा है। अब मुझे डर कर नहीं हिम्मत से काम लेना चाहिए, ये सोचकर मैं डरते डरते ही किचन में गया, उस लड़की से करीब एक मीटर की दूरी से ही पूछा ......ह ..ह... हेलो क...कौन हो तुम ?

सामने से ... वैसे ही बैठी - बैठी सिसकती हुई वो बोली, मैं नैना हूँ। मैं तो नैना का नाम सुनकर वही जम गया। अब मेरी मौत मेरे सामने बैठी रोती हुई नज़र आ रही थी। आज तो मैं गया मेरी मौत निश्चित है, ये सोचकर मेरे हाथ पैर फूलने लगे।


उसने कहा - आपको मुझसे डरने की जरुरत नहीं है, मैं कभी आपको नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी, मेरे साथ बहुत गलत हुआ है। ये मेरा ही कमरा था, आप मुझसे मत डरो, पर आप मुझे यहाँ से निकालने की कोशिश भी मत करना, मैं तुम्हारी हमेशा सहायता करुँगी, मुझे तुम अपना दोस्त ही समझो। मुझे उसकी बातें सुनकर थोड़ी सी राहत मिली, मैंने भी उसको आश्वासन दिया की मैं उसे इस घर से नहीं निकालूंगा।

उसने कहा - आज के बाद इस घर में कोई पंडित नहीं आना चाहिए, मैं एक अच्छी दोस्त की तरह हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगी, तुम बिलकुल भी मत डरना।   

मेरा भी डर इतनी बातें सुन के गायब हो गया, अगले दिन जब मैं सो कर जगा तो मुझे नाश्ता और लंच तैयार मिला, और एक चिट्ठी भी मिली।


उसमे लिखा था....

मैं नैना ....मैंने आपके लिए लंच तैयार कर दिया है, आप नाश्ता करके लंच लेकर ऑफ़िस चले जाइये, मैं घर का सारा काम मैं देख लूंगी। मैंने भी नाश्ता करके अपना लंच लेकर ऑफ़िस आ गया, अब सब ठीक हो गया था, रात को मुझे बना बनाया खाना मिलता, और पूरा घर साफ़ सुथरा रहता। हां एक बात है, नैना मुझे कभी दिन में नहीं दिखती थी, नैना जब भी मुझसे मिलने आती वो वक़्त रात के दो बजे का होता था। मैं भी अब बिना किसी डर के रिलैक्स हो गया था, अमित को भी लग रहा था कि अब नैना जैसी कोई चीज नहीं है। पंडित जी की पूजा की वजह से उस नैना की आत्मा अब नहीं रही, सब कुछ इसी तरह नार्मल चल रहा था।

एक दिन अमित ने मुझसे कहा - अरे यार इस रविवार को तेरे घर पार्टी करते है, पूरी रात मूवी देखेंगे, कुछ अच्छा खाएंगे और खूब मस्ती करेंगे। पहले तो मैं हिचकिचाया ....सोचने लगा मेरे घर में नैना भी तो है इसको कैसे घर बुलाऊँ। पर अमित के ज़िद के कारण मैंने अमित को रविवार की पार्टी के लिए हां कर दिया। रविवार आ ही गया, हम शाम को मिलने वाले थे, अब मेरा घर पहले की तरह गंदा फैला फैला नहीं रहता था, अब पूरा घर साफ़ सुथरा और व्यवस्थित होने लगा था। ये सब साफ़ और व्यवस्थित होने का श्रेय नैना को जाता था, शाम 6 बजे अमित आया। उसके आते ही मैंने दो कप चाय बनाया, और हम दोनों चाय पीते पीते बातें करने लगे। 


आज का मौसम भी अच्छा था ...

अमित -अरे यार ....तेरे पास कोई नई मूवी है क्या .....और खाने पीने का क्या प्लान है,

यार ....मेनू तो बता।

मैंने कहा - अरे दो चार नई मूवी है और रही बात खाने की तो देख चिकन मंगवाया है, थोड़ी देर में आ जायेगा, रोटियाँ भी साथ में आएगी, आइसक्रीम मैं पहले ही ले आया था।

अमित - और मैन मेनू हमारा .....

मैंने कहा - हां वो भी है, पर एक गिलास से ज्यादा नहीं मिलेगा।

अमित -ठीक ..है...भाई   हमारे लिए तो एक ही गिलास पूरी बोतल के बराबर है, हम कौन से नसेड़ी है।

चाय की चुस्की के साथ हमारी बातें भी खत्म हुई और डिलीवरी वाला भी सारा आइटम लेकर आ गया। 

अमित आज रात की पार्टी के लिए बहुत एक्साईटेड था,

अमित ने कहा -खाना बाद में खाएंगे, पहले कुछ पीते है यार ...

मैंने उसको समझाते हुए कहा - देख भाई खाली पेट पीना ठीक नहीं है, पर अमित ज़िद करता रहा, मैंने कहा देख भाई अभी खाना शुरू कर लेते है लगभग 8 बज ही गया है। खाते खाते 9 बज जायेगा, फिर आराम से मूवी देखते हुए पिएंगे।

अमित भी इस बात पर मान गया, हमने वैसा ही किया पहले खाना खाया फिर आइसक्रीम खाकर अपना आज का डिनर फिनिश किया।

खाना बहुत टेस्टी था चिकन रोटी चावल सलाद सब कुछ था, लास्ट में आइसक्रीम भी बहुत टेस्टी था, उसके बाद एक अच्छी सी मूवी लगाकर हम दोनों एक एक गिलास लेकर बैठ गए।

मूवी होर्रर थी, मूवी देखते देखते हम पी रहे थे!

तभी अमित ने हँसते हुए कहा - हां..हां..हां....हां होर्रर मूवी ...भूत।

इस घर में भी एक भूत थी ..नैना हां ...हां...हां...हां...

मुझे उसका इस तरह से नैना का नाम लेकर हँसना ठीक नहीं लगा, मुझे तो इस बात का डर भी था कि क्या पता नैना इसकी बात सुन ले तो नैना को कैसा लगेगा। मैंने मूवी को रोकते हुए अमित से बोला - बस ..बस ...बहुत हो गया अमित।

किसी भी चीज का मज़ाक बना देते हो तुम, तुम्हें समझ नहीं आता दूसरे की फीलिंग का।

नैना भूत है, तुम्हें ज्यादा पता है कभी मिले हो नैना से। सुनी है तुमने उसकी तकलीफे।

जब तक तुम्हें किसी के बारे में ठीक से पता न हो तब तक उसके बारे में बोलने की कोई जरूरत नहीं है।

तुम जानना चाहते हो नैना कौन है, आज रात पता चल जायेगा तुम्हें।

मैं बोलता जा रहा था, और अमित मुँह को खोले ये सब सुनता जा रहा था।


अमित का गिलास आधा ख़ाली आधा भरा ही रह गया !

अब ये सब सुनकर उसका सारा नशा उतर गया, अब वो क्या करता घर भी वापस नहीं जा सकता था।

अब इन बातों के बाद किसको मूवी देखने की पड़ी थी।

जो भी था उसे साफ़ करके हम दोनों सोने चले गए, मुझे तो बहुत नींद आ रही थी, पर अमित की नींद गायब थी।

उसको कई बार करवट बदलते महसूस किया था मैंने, पर नींद आ रही थी मुझे तो मैंने उससे कहा सो जा अमित आराम से कुछ नहीं होगा डर मत ...

ये कहकर मैं सो गया, रात को मुझे अमित की फुसफुसाने की आवाज़ आई। वो डरा हुआ था, धीरे धीरे हलकी आवाज़ में मुझे बुला रहा था।

मेरे घर की खिड़कियाँ आपस में टकरा रही थी, बाहर का मौसम ख़राब था, और हवा के तेज झोकों से खिड़की टकरा रही थी। अमित शायद खिड़की की आवाज़ से डर गया था, मैंने जाकर कमरे की लाइट जलाई। लाइट जलाते ही मेरी नज़र अमित पर गई, वो पसीने में डूबा हुआ था, उसके गले से आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने झट से जाके खिड़की बंद कर दी और दौड़कर अमित के पास पहुँचा। उसको संभाला पानी पिलाया, फिर मैंने अमित से कहा भाई तू ठीक है न...तू अपने मन से डर निकल दे, इस घर में डर जैसा कुछ नहीं है।

नैना मेरी दोस्त है वो कभी भी मुझे या किसी और को भी कोई हानि नहीं पहुँचायेगी, उसने मुझसे वादा किया है।

अमित - क ..क ...क्या बकवास कर रहा है तू ...

तेरा दिमाग तो ठीक है या तू पागल हो गया है " मुझे यहाँ आना ही नहीं चाहिए था बस किसी तरह सुबह हो जाए "( मन में बुदबुदाते हुए बोला ) 

मैंने अमित से बोला -देख यहाँ जो भी हो रहा है, जो भी होगा, उससे तू मत डर ये सब नार्मल है ओके।


तभी मेरी नज़र घड़ी पर गई, दो बजने वाले थे नैना के आने का टाइम हो गया था तो, मैंने अमित को बता दिया कि नैना दो बजे आती है, जब वो मुझसे बात करे तो डरना मत। वो नार्मल 16 साल की लड़की है, वो कोई नुकसान नहीं पहुँचायेगी। बोलने को तो मैंने बोल दिया पर मैं अमित की हालत भी समझ सकता था, मेरी तो आदत थी, पर उसके लिए ये सब नया और डरावना था। इसलिए उसे बार बार समझाता रहा कि वो न डरे, कोई दिक्कत नहीं होगी,

दो बज गए और नैना भी आ गई, मैं और अमित बेड पर बैठे थे। नैना आकर हमारे सामने की कुर्सी पर बैठ गई, मैंने नैना से बात करनी शुरू की।

मैंने कहा - हेलो नैना, ये मेरा दोस्त अमित है मेरा बेस्ट फ्रेंड है जैसे हम दोस्त है वैसे ही ये मेरा दोस्त है मेरे साथ मेरे ही ऑफ़िस में जॉब करता है।

नैना - हेलो अमित।

अमित ने नैना को कोई रिप्लाई नहीं दिया, कभी वो मुझे घूरता तो कभी नैना को।

मैंने अमित से कहा - अमित नैना मेरी दोस्त है, तुझसे हेलो बोल रही है उत्तर तो दे .....

तब अमित ने डरते डरते कहा - ह ...ह .. हेलो न...नैना ....और फिर चुप हो गया।

नैना के साथ जो भी घटना घटी थी सब मैंने शुरू से लेकर अंत तक अमित को बताया और अमित से बोला - बेचारी नैना बहुत अकेली है, तू भी इसका दोस्त बन जा।

अमित डरते डरते - ओ..ओ..ओके ठीक है।

बात करते करते कब तीन बज गया पता ही नहीं चला, और तीन बजते ही नैना चली गई। नैना के जाने के बाद मैंने अमित से कहा - अमित सो जा अभी तीन बजे है 2-3 घंटे सो जा, फिर ऑफ़िस भी जाना है न। अमित ने फिर डरते हुए कहा -ओ..ओ...ओके ठीक है ( कहकर वो बेड पर लेट गया )...

सुबह सात बजे अमित उठा और घर चला गया, मैं भी फ्रेश होने चला गया, फ्रेश होकर आया तो नैना ने सारा नाश्ता और लंच रेडी कर दिया था, मैंने फटाफट नाश्ता किया और लंच लेकर ऑफ़िस चला गया।


आज अमित ऑफ़िस नहीं आया था, मैंने अमित को फ़ोन किया, पर अमित का फ़ोन ऑफ था, फिर मैंने सोचा कि दोपहर में कॉल कर लूँगा क्या पता अभी सोया हो। क्योंकि मेरे घर में तो उसे नींद आई ही नहीं थी, मैंने करीब तीन बजे फिर से अमित को कॉल किया, फ़ोन अमित ने उठाया।

हमारी बात हुई, उसने कहा कि थोड़ी तबियत ख़राब थी, इसलिए वो ऑफ़िस नहीं आया, फिर अमित ने मुझसे कहा कि वो मुझे किसी से मिलवाना चाहता है, तो मैं उससे शाम को मिलूं, मैंने भी अमित को ओके कह दिया।

शाम को 6 बजे ऑफ़िस की छुट्टी के बाद अमित मुझसे मिला, वो मुझे जिससे मिलवाना चाहता था, वो अमित का दोस्त ही था डा. झाझोर

उसके दोस्त से मिलने हम दोनों उसके दोस्त के अस्पताल गए, कभी अमित ने अपने इस डॉक्टर दोस्त के बारे में जिक्र नहीं किया था, खैर हम अस्पताल पहुँच गए।

ये डॉक्टर झाझोर एक साइक्लोजिस्ट डॉक्टर था, मुझे अब कुछ अजीब लगना शुरू हूँ आ।

मैंने अमित से कहा यहाँ तू मुझे जानबूझ के लाया है न।

मैं तुझे पागल नज़र आता हूँ । अब मैं गुस्से से भर चुका था।

तभी अमित आँखों में आँसू लिए हुए "भाई तू गुस्सा मत हो, मैं तुझे पागल नहीं समझ रहा हूँ, बस एक बार तू डॉक्टर से बात तो कर ले।

मुझसे उसकी आँखों में आँसू नहीं देखे गए, और मैं डॉक्टर झाझोर से मिलने को राज़ी हो गया, अमित मेरा अच्छा दोस्त था, हर पल मेरे साथ रहा।

जब मैं नैना से डरता था तब वो मेरे साथ मेरे कमरे में सोने आया, मेरे साथ जाकर पंडित जी को ले आया, वो हर पल हर मुसीबत में मेरे साथ रहा, और अब भी तो मेरा ही भला चाहता है। मैं जानता हूँ कि मैं पागल नहीं हूँ पर दिखा लेता हूँ डॉक्टर झाझोर को, इसको भी तसल्ली हो जाएगी, ये सब सोचकर पहले अमित को चुप कराया और फिर डॉक्टर झाझोर से मिलने के लिए राज़ी हो गया।

    

मेरा नंबर आया मुझे डाक्टर साहब ने एक केबिन में बुलाया, उनके केबिन में हल्की रौशनी थी, बस अंदर जाते ही डॉक्टर साहब ने एक फ्लेट लॉन्ग चेअर पर सोने को बोला। मैं उस कुर्सी पर लेट गया, मेरे सामने ऊपर की तरफ एक डिस्क घूम रही थी, उसपर काले सफ़ेद लाइने बानी हुई थी,

सिर्फ उसी डिस्क मैं लाल रोशनी थी, और पूरा कमरा अंधेरे में था। मुझपर रौशनी आ रही थी, तभी डॉक्टर ने कहा तुम इस डिस्क पर अपना ध्यान केंद्रित करो मैंने वैसा ही किया। ऐसा करने के थोड़े ही देर में मेरी पलके भारी होने लगी, डॉक्टर ने बोला तुम्हारी आँखें भारी हो रही है ....धीरे धीरे नींद आ रही है ...तुम सो रहे हो..... इसके बाद का मुझे कुछ भी याद नहीं क्या हुआ..जब मैं बाहर आया तो अमित डरा हुआ था, डॉक्टर ने बताया की नैना कोई नहीं है नैना मेरे अंदर ही है, अब डरने की बारी मेरी थी, डॉक्टर ने बताया की रोज मैं नैना बनकर सारा काम पूरा करता था, और फिर नार्मल होकर ऑफ़िस का काम संभालता ये सब इसलिए हुआ क्योंकि मैं अकेला रहता था। मुझे अकेला रहना पसंद नहीं था मैं हमेशा एक पार्टनर ढूँढता था जो मेरे काम में हाथ बंटा दे मैं ऑफ़िस से आऊँ तो मुझे कुछ करना ना पड़े, इन्ही सब कारणों से ये नैना का जनम हुआ वास्तव में नैना तो कोई है ही नहीं....

मैंने डॉक्टर झंझोर से कहा अगर नैना कोई नहीं है, नैना मेरे अंदर है, तो उस भिखारी बाबा ने जो कुछ बोला था क्या वो झूठ था, उसने अपनी पत्नी सुलोचना दोस्त रमेश और बेटी नैना की जो भी बातें कही वो सब क्या था ...

फिर डॉक्टर ने मुझे जवाब दिया की तुम्हें याद है जब तुम सात साल के थे तभी तुम्हारे दूर के रिस्तेदार के साथ कुछ ऐसी ही घटना घटी थी और कई दिनों तक ये बात तुम्हारे घर में कई बार सुनाई जाती थी। ये कहानी तब की है जिसे तुम्हारे दिमाग ने एक भिखारी से जोड़ दिया और ये इसलिए हुआ क्योंकी तुमने अपने पापा के मुँह से सुना था कि उसकी पत्नी सुलोचना के भाग जाने के बाद उसका पति भिखारी बन गया है ...इसलिए जब तुम्हें अकेलेपन ने घेर लिया तो तुम्हारा दिमाग कहानियाँ गढ़ने लगा, पहले भिखारी बाबा की कहानी फिर नैना की कहानी अच्छा हुआ की तुम्हारे दोस्त को शक हुआ और वो आकर मुझसे मिला।


पर अमित तुझे शक कैसे हुआ....

अमित-कल जब तू पीते वक़्त मुझे नैना के बारे में बता रहा था, तब तू मेरा दोस्त नहीं था तेरे हाव् भाव बदल रहे थे जैसे कोई लड़की हो फिर दो बजे रात को जब तू नैना से बात कर रहा था तो उस टाइम कुर्सी पर कोई नहीं था तू ही बातें कर रहा था, इसलिये कल रात को मैं इतना डरा हुआ था ....

ये सारी बातें सुन कर भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा था,और कैसे करता मैं विश्वास ये मेरे लिए विश्वास के बहार की बात थी तभी डॉक्टर झंझोर ने मुझे अपने कंप्यूटर पर मेरे साथ की गयी सेशन की वीडियो दिखाई। उसे देखकर सब साफ़ हो गया, सब समझ में आ गया ये सब कैसे हुआ। डॉक्टर ने कहा जब मैं नैना होता हूँ तो मुझे खुद का एहसास नहीं होता हैं , और यही नहीं डॉक्टर झाझोर ने बताया की अमित ने तुम्हारी सोसाइटी में भी उस भिखारी के लिए उस जगह के कई लोगो से पूछताछ की। वीडियो भी डॉक्टर साहब ने दिखाई, सबने यही कहा की यहाँ कोई भिखारी कभी नहीं रहता था , ये वीडियो अमित ने बनाकर डॉक्टर साहब को दिया था, क्योंकि मैंने अमित को सब बताया था की भिखारी बाबा के मिलने के बाद से नैना इस रूम में दिखाई देने लगी।

खैर अब मैं ठीक हूँ लगातार तीन महीने की सेशन के बाद अब नैना कभी भी मुझसे मिलने नहीं आती अमित मुझसे मिलता भी है और पार्टी भी करते है, वो भी बिना डरे....  

तो अब आप लोगो को समझ में बात आई अकेले में अपने दिमाग से ज्यादा बात करना कितना खतरनाक है, और ऐसे ही लोग डिप्प्रेशन का शिकार हो जाते है, इसलिए हमें खुद को बिजी और खुश रखना चाहिए .....


    

     

   

         


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