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Kunda Shamkuwar

Abstract Others

4.0  

Kunda Shamkuwar

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इमेज और अदृश्य दीवार…

इमेज और अदृश्य दीवार…

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आज न जाने क्यों मेरा मन उलझा उलझा सा लग रहा हैं। क्यों हैं यह उलझन? क्या करे इस उलझन का?

बाय द वे क्यों नहीं हम अपनी उलझन किसी से शेयर कर सकते?

कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करते करते कहीं ऐसा तो नहीं की हम सभी ने अपनी अपनी ज़िन्दगी में कोई अदृश्य दीवार बना कर रखी हों? दीवार वह भी इमेज के साथ !!! उस इमेज को सूट करती दीवार…इस इमेज वाली दीवार के साथ क्या इस उलझन को शेयर करूँ? क्योंकि जो भी लिसनर होगा वह भी तो कॉर्पोरेट ऑफिस वाला मेरा दोस्त होगा। उसकी भी तो अपनी इमेज वाली दीवार होगी न?

इसी उलझनी माहौल में अचानक ह्वाट्सऐप मेसेज का नोटिफिकेशन दिखा। मैसेज मेरे दूसरे कॉर्पोरेट ऑफिस वाली फ्रेंड का था।

मैसेज में एक सवाल था…"क्या तुमने कभी घुन देखा हैं?"

मुझे बेहद अचरज हुआ। क्योंकी घुन को हम सभी ने देखा हैं और उसके बारें में पढ़ा भी हैं जैसे गेहुँ के साथ घुन पिसता हैं वगैरह….थोड़ी ही देर में उसी फ्रेंड का दोबारा मैसेज आया। मैंने झट से मैसेज देखा। मैसेज में उसने लिखा था, "तुम सोचोगी कुछ भी बोलती रहती है ये। मुझे नींद में ख़्याल आया कि सबने घुन देखा है, लेकिन मैंने 6 फुट वाला घुन देखा है जो बाकायदा पैंट शर्ट और पॉलिश किए जूतें पहनकर सभ्य दिखने का प्रयास करता हैं। बस पैंट शर्ट वाला घुन यही catchy लाइन थी। जिसने इतने लंबे समय में दूसरों को खोखला कर दिया।और अभी भी बड़े गर्व से तथाकथित अपनों के सामने कहता है हम दुनिया में मौज करने आए हैं। चलो ठीक है ok bye, good night…"

इस मैसेज को पढ़ने के बाद मुझे मेरी उलझन अब बेहद छोटी नज़र आने लगी।

अक्सर हम दोनों बात करते थे…हमारी चैट भी होती रहती थी…

बहुत दिनों के बाद उसका मैसेज आया था। मुझे याद आया उसके साथ मेरी बहुत दिनों से बात नहीं हुयी…इस मैसेज को पढ़ने के बाद मुझे स्थिति की गंभीरता का अहसास हुआ। क्योंकि रात ज़्यादा हो चुकी थी तो मैंने कल सुबह बात करने के  लिए सोचा।

हाँ, लेकिन उस को एक पॉज़िटिविटी वाला मैसेज ज़रूर शेयर कर दिया।

सुबह की किरण नयी आशा लेकर आयी। न जाने क्यों आज की सुबह मुझे नयी लग रही थी।

हम दोनों ही कैब से अपने अपने ऑफिस जाते हैं तो बात करने के लिए ऑफिस जाने का वक़्त सही था। ऑफिस जाने के लिए कैब में बैठी और उससे बात करने के लिए मैंने फ़ोन लगाया… बात शुरू हो गयी तो मुझे अंदाज़ा हो गया कि आज उसका मूड अच्छा हैं। कल वाली नेगेटिव कोई भी बात नहीं लग रही थी। मैंने इधर उधर की बात ना करते हुए उसको पूछा, "क्या हुआ था कल रात को?  6 फीट की घुन की बात लिखी थी। ऐसा लग रहा हैं की तुम ये कहना चाह रही हो किसी 6 फीट वाला आदमी तुम्हे किसी घुन की तरह खोखला कर रहा हैं…क्या सच में ऐसा हैं क्या? घर में क्या कोई प्रॉब्लम हैं??

वह हँसते हुए कहने लगी, "अरे, नहीं…बिल्कुल भी नहीं… सब कुछ ठीक हैं… वह तो मैंने रात को वैसे ही लिख दिया था… नथिंग सीरियस…डोंट वरी"

सही तो हैं, हम सभी ने अपनी अपनी ज़िन्दगी में एक अदृश्य दीवार बना कर रखी हैं…दीवार वह भी इमेज के साथ !!! उस इमेज को सूट करती दीवार…अपनी इमेज वाली दीवार के साथ क्या वह अपनी उलझन को मुझसे शेयर कर सकेगी?

बिल्कुल भी नहीं…क्योंकि हम सभी ने अपनी इमेज बनाने के लिए काफ़ी मेहनत जो की हैं…


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