सजे धजे कोनें…
सजे धजे कोनें…
घर के कोनों का अपना इम्पोर्टेंस होता हैं। ड्रॉइंग रूम वाले कुछ कोनें सजे धजे होते हैं कॉर्नर्स के साथ… लेकिन घर के सभी कोनें खुशनसीब नहीं होते…जैसे किचन के कुछ कोनें झाड़ू पोछे जैसे फ़ालतू चीज़ें छुपाएँ हुए होते हैं…न जाने क्यों वे कोनें ख़ाली और उदास होते हैं…
अक्सर मुझे लगता हैं की इन सभी कोनों से तुम्हारी यादें झाँकती रहती हैं…ड्रॉइंग रूम में रखे कॉर्नर में किताब रखी हैं…जो तुमने मेरे पिछले बर्थडे पर मुझे गिफ्ट किया था…
मैं उस किताब को उठाकर उलटना पलटना चाहती हूँ… उसमे रखे गुलाब के फूल की भीनी महक को फिर से महसूस करना चाहती हूँ… लेकिन यकायक मैं अपने कदम पीछे खींच लेती हूँ जानकर की तुम अब यहाँ नहीं हों।एक्चुअली मैं उस किताब को बार बार पढ़ना चाहती हूँ जैसे की तुम्हें पढ़ना…
लेकिन फिर से मैं उस कॉर्नर्स की बुक से नज़रें हटा देती हूँ क्योंकि अब तुमने अपनी अलग दुनिया बसा ली हैं…हाँ, तुम्हारे बताये बग़ैर भी मैं जानती हूँ की तुम भी इसी शहर में रहते हो एक कोने में और एक कोने में यहाँ मैं… जैसे की मैंने कहा हैं सभी कोनें खुशनसीब नहीं होते… न जाने क्यों कुछ कोनें ख़ाली और उदास होते हैं…
