दुनिया…
दुनिया…
नीले आसमाँ के नीचे ऊँचे पहाड़, लहराती नदियाँ, हरे भरे जंगल और गहरे समंदर और बेशुमार लोग हैं…इस अनंत आसमाँ में ढेरों सितारों और लाखों गैलेक्सीज़ के होते हुए भी हमे हर वक़्त तनहाइ का अहसास क्यों होता रहता हैं? …
इस अदद पृथ्वी की एक दुनिया में में न जाने हम सभी इंसानों की कितनी सारी दुनियाएँ बसती हैं…
हर एक की दुनिया अलग…
हर एक की दुनिया की कैफ़ियत अलग…
हर एक इंसानों की पीड़ाएँ अलग…
हर एक के सुख अलग…
हर एक हिस्से की धूप छाँव भी अलग…
आज इस इंस्टा और फेसबुक की दुनिया में हम अपनी दुनिया फ़्लॉण्ट करते हैं…क्या वह सच्ची दुनिया होती हैं?
शायद नहीं…हम आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़माने में अपने पीड़ाओं को फ़िल्टर लगाये फोटों और आर्टिफिशियल फीलिंग्स के साथ दुनिया को दिखाते हैं…Some friends comments and click like button…We also thanks to everyone…
यह इंस्टा और फेसबुक की दुनिया मायावी हैं…यहाँ हम सभी की टाइम लाइन में खुशियों के ही रंग बिखरें होते हैं…लगता हैं जैसे सारी पीड़ाएँ किसी और ग्रह में शिफ्ट हो गयी हो…मेरे सर्किल में मैं न जाने कितने ही लोगों को जानती हूँ जो अपनी फोटोज़ को इंस्टा और फेसबुक में फ़्लॉण्ट करते हैं लेकिन हकीकत में उनके रिश्ते में बेहद दूरियाँ होती हैं…हर कोई यहाँ इस दुनिया में मुखौटे लगाये फिर रहा हैं… मुझे यो कई बार यह दुनिया मुखौटो वाली दुनिया ही लगती हैं …लेकिन जो कुछ भी हो यह दुनिया हैं तो बहुत मेस्मराइजिंग…
कुछ लोगों के लिए जिंदगी ज़िंदादिली का नाम हैं तो कुछ लोगों के लिए ज़िंदगी आज़माइश…
