इमेज और अदृश्य दीवार…
इमेज और अदृश्य दीवार…
आज न जाने क्यों मेरा मन उलझा उलझा सा लग रहा हैं। क्यों हैं यह उलझन? क्या करे इस उलझन का?
बाय द वे क्यों नहीं हम अपनी उलझन किसी से शेयर कर सकते?कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करते करते कहीं ऐसा तो नहीं की हम सभी ने अपनी अपनी ज़िन्दगी में कोई अदृश्य दीवार बना कर रखी हों? दीवार वह भी इमेज के साथ!!! उस इमेज को सूट करती दीवार…इस इमेज वाली दीवार के साथ क्या इस उलझन को शेयर करूँ?क्योंकि जो भी लिसनर होगा वह भी तो कॉर्पोरेट ऑफिस वाला मेरा दोस्त होगा। उसकी भी तो अपनी इमेज वाली दीवार होगी न?
इस मैसेज को पढ़ने के बाद मुझे मेरी उलझन अब बेहद छोटी नज़र आने लगी।
अक्सर हम दोनों बात करते थे…हमारी चैट भी होती रहती थी…
बहुत दिनों के बाद उसका यह मैसेज आया था। मुझे याद आया उसके साथ मेरी बहुत दिनों से बात नहीं हुयी…इस मैसेज को पढ़ने के बाद मुझे स्थिति की गंभीरता का अहसास हुआ। क्योंकि रात ज़्यादा हो चुकी थी तो मैंने बात करने की आईडिया को कल सुबह के लिए छोड़ दिया।
सुबह की किरण नयी आशा लेकर आयी। न जाने क्यों आज की सुबह मुझे नयी लग रही थी।
हम दोनों ही कैब से अपने अपने ऑफिस जाते हैं तो बात करने के लिए ऑफिस जाने का वक़्त सही था। ऑफिस जाने के लिए कैब में बैठी और उससे बात करने के लिए मैंने फ़ोन लगाया… बात शुरू हो गयी तो मुझे अंदाज़ा हो गया कि आज उसका मूड अच्छा हैं। कल वाली नेगेटिव कोई भी बात नहीं लग रही थी। मैंने इधर उधर की बात ना करते हुए उसको पूछा,“क्या हुआ था कल रात को? 6 फीट की घुन की बात लिखी थी। ऐसा लग रहा हैं की तुम ये कहना चाह रही हो किसी 6 फीट वाला आदमी तुम्हे किसी घुन की तरह खोखला कर रहा हैं…क्या सच में ऐसा हैं क्या? घर में क्या कोई प्रॉब्लम हैं??
वह हँसते हुए कहने लगी, “अरे, नहीं…बिल्कुल भी नहीं… सब कुछ ठीक हैं… वह तो मैंने रात को वैसे ही लिख दिया था… नथिंग सीरियस…डोंट वरी”
सही तो हैं, हम सभी ने अपनी अपनी ज़िन्दगी में एक अदृश्य दीवार बना कर रखी हैं…दीवार वह भी इमेज के साथ!!! उस इमेज को सूट करती दीवार…अपनी इमेज वाली दीवार के साथ क्या वह अपनी उलझन को मुझसे शेयर कर सकेगी?
बिल्कुल भी नहीं…क्योंकि हम सभी ने अपनी इमेज बनाने के लिए काफ़ी मेहनत जो की हैं…
