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Meenakshi Kilawat

Drama

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Meenakshi Kilawat

Drama

युगों युगों से वो तेरी लगन में

युगों युगों से वो तेरी लगन में

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वृंदावन में धूम मचाई ,राधारानी प्रेम में डोली

 बसे है गीत जन मन में मीरा रानी के 

मधुर बांसुरी बजती हैं तुम्हारे होठों पर

द्वारकाधीश कहां खो गए तुम नगरी में।


 तुमको पुकारे कान्हा अभी तक राधाजी 

प्यारी सी मंशा है अब भी उनकी अधूरी

एक बार आ जाओ मिलने धरा पर 

ना तरसाओ द्वारकाधीश मुरारी।

  

जादू कर दिया तुमने दुनिया वालों पे

 कर दिया मालामाल अपने प्रेम से

आजाओ गोपाल कभी मिलने ग्वालों से 

आजाओ कभी मिलने भोले भक्तों से।


तुम्हारी कीमत वही जाने वही पहचाने 

बह गई जोगन तुम्हारे प्रेम आंचलमें 

कोई माने या ना माने,राधा है दीवानी

समा गई मोहन तुम्हारे वो नैनन में।


तोड़ दिया भरम प्रेममें जीने वालों का

ना भूलाओ अपनें चाहने वालोकों

जब से बने द्वारकाधीश राजघरानेकें 

कर्म श्रेष्ठ ज्ञान सिखाया जगवालों को।


तुम तो संसार सागर की धूप और छाया

बस गए हर दिलमें है तेरी ही छाया 

तेरी है कमाल हमरी बिघडी तू संम्भाल

जिधर उधर हमने तुझको ही है पाया।


दर्द जुदाई सहले बंदे प्यार को तू पढ़ ले

मोहन तुम्हारी याद में दुख सुख के गहने पहने 

एक दुजे के सदा ही संगसंगमें ही रहते

ना छोडेंगे साथ हम तेरा कोई जनममें।।


दिया प्रेम का संदेश जगवालोको  

दिन रात करते है ध्यान तुम्हारी लगन में

अब तो दरश दिखादो आकर दिलमे

ना जलाओ कान्हा तुम इस बिरह में।


कर दिया तुमने कमाल कमलीवाले 

करते हैं भक्ती तुम्हारे अनुराग में 

भूलो ना तुम भक्तों के भोले भाव को

तेरे लिए करेंगे त्याग और बलिदान में।


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