STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Action Crime Thriller

4  

Kanchan Prabha

Action Crime Thriller

युद्ध प्रपंच

युद्ध प्रपंच

1 min
394

युद्ध है प्रपंच है

सेना विध्वंस है

किसे बताये अपना प्यादा

चारों ओर षड्यंत्र है 

हाथियों की झुंड 


कहीं कंकाली मुंड है

तीर की तपिश है

जुवाँ यहाँ विष है

जीवन्त उदाहरण जो

 जीवन और मरण का


 शंख की आवाज है

 मुश्किलों में ताज है

दिल हिन्डोले मारे कभी 

कभी बढाये धड़कने

घोड़ों की चाप से

टप टप की थाप से


ये शोर मचा है कैसा

मुर्दों के बाजारो जैसा

कोई चिल्लाए रोये ऐसे

सबकुछ लूट रहा हो जैसे

कण कण भी तो रोया आज


मौत की नींद में सोया आज

धरती रंगी लहू के रंग

खेले सब हथियार के संग

 राह देख रही बैरन गोरी

कब अहिये सजंवां मोरी

देखी देखी अब मन घबराया 


नभ पर कैसा बादल छाया

रोये पँछीऔर परिंदे

उड़ी है सबकी चैन और नींदे

गिरते-गिरते बचते राजा

आज ना उनकी बचेगी लाजा


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action