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yogita singh

Romance Fantasy

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yogita singh

Romance Fantasy

वो बैरी चांद

वो बैरी चांद

1 min
96


ताकती निगाहें उस चांद को एकटक

उस चांद में तेरा अक्स नज़र आता है


चुप चाप एक टक निहारती हूं उसको 

मानो वो तुम्हारा कोई संदेश लाया है


छिप के बादलों में कभी कभी दीदार करता है 

ये बिल्कुल तुम्हारी ही तरह मुझे जलता है


उस चांद में तेरा अक्स नजर आता है


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