STORYMIRROR

yogita singh

Abstract Classics Thriller

4  

yogita singh

Abstract Classics Thriller

दुल्हन

दुल्हन

1 min
279

फूलों की डोली साजाई जा रही है

वो देखो

एक लड़की दुल्हन बनाई जा रही है

उसके सपनों की अर्थी उठाई जा रही है


वो देखो

एक लड़की दुल्हन बनाई जा रही है

जिस उम्र में हांथ में पकड़ने थे कलम

उस उम्र में घर कि चाभी थमाई जा री है


वो देखो

एक लड़की दुल्हन बनाई जा रही है

आंखो मे ना जाने थे कितने सपने

उन्ही आंखो से आंसू बहाए जा रही है


वो देखो

एक लड़की दुल्हन बनाई जा रही है

फूलों की डोली साजई जा रही है

वो देखो ना

एक लड़की दुल्हन बनाई जा रही है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract