STORYMIRROR

Anu Yadav

Abstract Inspirational

4  

Anu Yadav

Abstract Inspirational

कपडा या इज़्ज़त?

कपडा या इज़्ज़त?

1 min
380

रेशम का कपड़ा समझ के तूने जिसको है छुआ

वो है किसी का सम्मान और किसी की मर्यादा 

बाल समझ के तूने जिससे है पकड़ा

वो है किसी का अभिमान और किसी के खुशियों का राज 

औरत हो या मर्द हो 

किसी के साथ नहीं खेल सकता कोई इस तरह 

नहीं छू सकते तुम उनको, समझ के अपना खिलौना

शब्दों में बयां नहीं हो सकती

की क्या क्या लोगों ने है झेला

भाई - दोस्त जिसको समझा वो ही दुख दर्द दे गया 

वो हर आँसू जो निकले उस इंसान की आँखों से 

उसकी कीमत तुम्हारी सातों पीढ़ी चुका नहीं सकती 

जो आग के चक्र में ला के खड़ा कर दिया 

उस चक्र को पानी से नहीं बुझाया जा सकता

जिन यादों को जन्म दिया है 

उसको किसी भी दण्ड से भुलाया नहीं जा सकता 

इंसान को इंसान की तरह रहना चाहिए 

अगर एक बार वो जानवर बन जाए

तो वापस वो कभी नहीं बदल सकता 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract