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Anu Yadav

Abstract

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Anu Yadav

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एक अनोखी जगह

एक अनोखी जगह

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जन्नत था या ब्रह्म

मुझे वो जगह समझ नहीं आयी

ऐसे लोग थे वहां 

जिनकी नियत कभी ठीक से दिखाई नहीं दी

कुछ लोगो से नाता टूट गया

कितनो के साथ सीमेंट के घोल से जुड़ गया

एक सफर मानूं

या एक पाठ

जीवन ने देखने के लिए सबको भेज दिया उस जगह

किसी की ये थी एक अच्छी शुरुआत

कितनो के लिए ये निकल गयी 

चुनोतियों का पिटारा

जो बनाएगा उनको हीरा डाल कर उनपर दबाव

न जाने वह कैसा स्थान था

बिताया मैंने वहा अपना आधा जीवन

लेकिन कोई मिला नहीं ऐसा जिसके साथ

कभी हुआ नहीं कुछ बुरा

प्यार से लोग उससे कहते हैं

स्कूल मेरे यार।


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