STORYMIRROR

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

3  

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

मैं हिन्दी, हिन्दुस्तान की...

मैं हिन्दी, हिन्दुस्तान की...

1 min
296

मैं शब्द कोष से निकला एक अक्षर हूँ 

शब्द में जुड़ता हूँ तो अपना अस्तित्व लेता हूं 

वाक्य में जुड़ता हूँ तो अपना अर्थ देता हूं 

मेरी सार्थकता या निर्थकता को पढने वाले 

और उस वाक्य के अर्थ को समझने वाला ही जान सकता है 

मैं आधिकारिक तौर पर पूरा तो नहीं 

पर अधूरी क्षमता भी मुझमें नहीं 

हर अक्षर, हर शब्द, हर वाक्य पर मेरा अपना अधिकार है 

किसी और के लहजे से मुझे सदा ही इनकार है 

मै शेष अशेष का ध्यान रखती हूँ 

मैं उच्चारण और लिखने का दोगला रूप नहीं अपनाती

मैं हिन्दी हूँ अपने हिन्दुस्तान की.......!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract