STORYMIRROR

सुरशक्ति गुप्ता

Tragedy

4  

सुरशक्ति गुप्ता

Tragedy

प्यार

प्यार

1 min
385

बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं

जो नाज़ो से पाली जाती हैं

पापा की परी 

मां की है लाडली

बहनो के गहनों से सजी 

पर कब भाई के लिए बोझिल हो गई 

पता ही नही लगा

ऐसी बेटियों को उनके भाई 

चिता का आभूषण पहनाते हैं

और अपना बोझ उतारते हैं

न आहूति किसी की 

न वरदान किसी का 

न भाग्य भरोसे 

न दान किसी का

वक्त लेगा करवट तब व्यंग्य भी होगे और कटाक्ष भी होगें

क्योकि धर्म का तराजू एक ओर नही रहता 

आज पलडा तेरा भारी है कल ईश्वर का होगा....



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy