STORYMIRROR

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

3  

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

प्रेम संदेश

प्रेम संदेश

1 min
177

मैं चिट्ठियों के सिलसिले को कब तक चलाऊं

 कभी तो उन्हें मैं जी भर कर देख पाऊं....


इतने करीब हो तुम मेरे

पर एहसास दूरियो का होता है

महज कुछ लम्हो का इतजार अब मेरी बेसुधगी को पिरोता है....


वक्त बेवक्त इतने याद न आया करो

छूकर मुझे अपनी बाहों में समाया करो......


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract