STORYMIRROR

Kajal Manek

Abstract

3  

Kajal Manek

Abstract

जीना पड़ता है

जीना पड़ता है

1 min
249

दर्द कोई चुनता नहीं,

बस ये तो सहना पड़ता है,


गम के लम्हें कोई बुनता नहीं,

बस इन्हें जीना पड़ता है,


यूं दुःख मिटाने कोई झूमता नहीं,

पर वो भी करना पड़ता है,


आंसू छुपाकर कोई मुस्काता नहीं,

पर आंसू पीना पड़ता है,


अपनों को दुःख न हो ये सोचकर,

अपना दुःख दर्द छिपाकर जीना पड़ता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract