Fahima Farooqui
Abstract
लोग रूठने लगे है।
रिश्ते टूटने लगे हैं।
सच जो कहा मैंने,
साथ छूटने लगे हैं।
बनावटी रिश्तों में,
दम घुटने लगे हैं।
आ गई दूरियाँ जब,
तब घर टूटने लगे हैं।
दिखाया जो आईना,
दोस्त रूठने लगे हैं।
नज़र तुम्हारी
मेरे एहसास
एक कमी
आहिस्ता आहिस्...
दिल
मुद्दे और भी ...
वक़्त
सपने
उत्सव की रात
मायाजाल
आ सको तो आज आओ, कल का वादा मत करो, आस को आकाश दो पत्थर की मूरत मत बनो फिर मेरी आँखों से सपने रूठ जाए... आ सको तो आज आओ, कल का वादा मत करो, आस को आकाश दो पत्थर की मूरत मत बनो फिर मेरी आ...
आषाढ़ मात्र नमी लिए था जल से रहित था उसका पात्र आषाढ़ मात्र नमी लिए था जल से रहित था उसका पात्र
सुबह का तो हाल ही मत पूछो, उसे चेहरा तुम्हारा नहीं भूलता, सोया सा मासूम सा,आखें मलते देखती थी तुम सुबह का तो हाल ही मत पूछो, उसे चेहरा तुम्हारा नहीं भूलता, सोया सा मासूम सा,आखें ...
ऊँगली के मृदु स्पर्शों से तन में सिहरन जाग उठे, उठते लाखों भाव मनस में, तब चेहरे पर फाग उठे......... ऊँगली के मृदु स्पर्शों से तन में सिहरन जाग उठे, उठते लाखों भाव मनस में, तब चेहरे...
यह रचना हर मां को समर्पित है। यह रचना हर मां को समर्पित है।
कामयाबी की कृतियाँ बहुत हैै, यह कुछ पक्तिंयाँ नाकामयाबी के नाम। कामयाबी की कृतियाँ बहुत हैै, यह कुछ पक्तिंयाँ नाकामयाबी के नाम।
सिर्फ समझा न गया, तो"स्त्री" का "स्त्री" होनाजो उसकी एकमात्र पहचान थी। सिर्फ समझा न गया, तो"स्त्री" का "स्त्री" होनाजो उसकी एकमात्र पहचान थी।
तुम अपनी ऊँगलियों की हरकतों से बुनो दुनिया नई तुम अपनी ऊँगलियों की हरकतों से बुनो दुनिया नई
कहाँ तलाश पाती हो/समाधान दृष्टि हीनता के अभाव में उलझी रही आती है पहेली कहाँ तलाश पाती हो/समाधान दृष्टि हीनता के अभाव में उलझी रही आती है पहेली
कहतें हैं की उम्र और बुद्धि की कभी भेंट नहीं होती क्योंकि उम्र रास्ते तलाशती है और बुद्धि मंजिल. कहतें हैं की उम्र और बुद्धि की कभी भेंट नहीं होती क्योंकि उम्र रास्ते तलाशती है ...
भले ही मुझे शर्म की चुनरी ओढ़नी पड़े पर अब भी मैं कली सी मासूम हूँ। भले ही मुझे शर्म की चुनरी ओढ़नी पड़े पर अब भी मैं कली सी मासूम हूँ।
ये बाते थोड़ी भ्रामक हैं, पर गर्भ इसका भयानक है...ये चल रही है ब्रह्माँड की गाथा और हम सब इसके वाचक ह... ये बाते थोड़ी भ्रामक हैं, पर गर्भ इसका भयानक है...ये चल रही है ब्रह्माँड की गाथा ...
क्यों थकता है तू क्यों रुकता है तू किसे ढूंढता है और किस पर मरता है तू ये सफ़र अकेले तय करना है तुझे.... क्यों थकता है तू क्यों रुकता है तू किसे ढूंढता है और किस पर मरता है तू ये सफ़र अक...
The portyal of importance of expectation in our and achievements. The portyal of importance of expectation in our and achievements.
हर ज़माने के साथ में, मैं उड़ता हुआ आता हूँतूफान हूँ मैं, महज़ आँधी ना समझनाबहती हवा हूँ मैं, भिगी ज़ि... हर ज़माने के साथ में, मैं उड़ता हुआ आता हूँतूफान हूँ मैं, महज़ आँधी ना समझनाबहती ...
हमने खुद को किया हवाले हमसे मत उम्मीद करो..अब बस तुम पर ही ठहरी है इस रिश्ते की गहराई.......... हमने खुद को किया हवाले हमसे मत उम्मीद करो..अब बस तुम पर ही ठहरी है इस रिश्ते की ...
इस कविता में हल्दी घाटी युद्ध का एवम महाराणा प्रताप की वीरता का वर्णन है। इस कविता में हल्दी घाटी युद्ध का एवम महाराणा प्रताप की वीरता का वर्णन है।
प्रेम की पराकाष्ठा क्या है ? एक बड़ा प्रश्न ...जवाब मुश्किल पर कोशिश करते रहते हैं हम ..... प्रेम की पराकाष्ठा क्या है ? एक बड़ा प्रश्न ...जवाब मुश्किल पर कोशिश करते रहते है...
कविता के अभिनन्दन में अदद आवरण अनुचिंतन को बोलो कैसे समझाऊ कविता के अभिनन्दन में अदद आवरण अनुचिंतन को बोलो कैसे समझाऊ
सद्भाव जगाये दीपावाली सद्भाव जगाये दीपावाली