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Fahima Farooqui

Others

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Fahima Farooqui

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नज़र तुम्हारी

नज़र तुम्हारी

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मौसम पर छाई हुई है ख़ुमारी।

या कर रही जादू नज़र तुम्हारी।


नज़र को चैन न दिल को क़रार

ख़ुदा जाने कैसी है ये बेक़रारी।


न कोई वादा न कोई मुलाक़ात,

बिना बात नींद उड़ी है हमारी।


आज दिल को यक़ीन आया कि,

मुहब्बत है सबसे बुरी बीमारी।


तुम्हारे सिवा कुछ सूझता नही,

नज़र में रहती है सूरत तुम्हारी।


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