Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Lipi Sahoo

Abstract


4.7  

Lipi Sahoo

Abstract


नज़रिया

नज़रिया

1 min 192 1 min 192

किसी को आजमाने की 

गुस्ताखी ना कर

सब ख़ुदा के बंदे हैं

खामखां उनकी तौहीन होगी


अक्स तो वाकई में साफ़ है

खामियां तो तुझमें है

तराशना हे तो

अपने हुनर को तराश !!


अपना नज़रिया बदल 

दिमाग से नहीं दिल से आज़मा

बुरा भी वो अच्छा भी वो

तेरे दहलीज पर आ कर सुकून मिले

वही इंसानियत है


इतना आसान नहीं ये सबक

आदतों को बदलना है बड़ा मुश्किल

रब की परछाई है मुअल्लिम

खुद को निछावर कर दे कदमों पर

राह दूजा ना कोई


महफूज़ कर देंगे

इस एहसास को

तू ही तू तो है संसार में

और दूजा ना कोई

किस्सा कोई भी हो महानाटक का हिस्सा है तू .......।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Lipi Sahoo

Similar hindi poem from Abstract