STORYMIRROR

Suresh Koundal 'Shreyas'

Abstract Inspirational

4  

Suresh Koundal 'Shreyas'

Abstract Inspirational

चिंता और चिंतन

चिंता और चिंतन

1 min
264

व्यर्थ की चिंता को तुम त्यागो

मुसकुराते घर को वापिस आओ

कल क्या होगा कल देखेंगे

जीवन चिंता मुक्त बिताओ


आने वाले कल की चिंता 

बीते हुए कल का अफसोस

चैन चुराते हैं जीवन का

चिंता जीवन का है इक दोष


चिंता ऐसा मय का प्याला

पीये जो फिरता है मदहोश

ये वो मीठा ज़हर है जिससे

जीवन घटता है हर रोज़


हंसना सीखो और सिखाओ

हंसकर सबका साथ निभाओ

कल क्या होगा कल देखेंगे

जीवन चिंता मुक्त बिताओ


चिंतन में बीतें जीवन के पल

चाहे साँझ चाहे सवेरा हो

फिक्र करो उतनी ही जिससे

ना अंतर मन अंधेरा हो


स्वस्थ निरोगी काया को जैसे

गिध्दों ने आ कर घेरा हो

चिंता युक्त मानव तन ऐसा

जैसे कई रोगों का डेरा हो


चिंता कर कर अमोलक देह को

यूँ हीं न तुम व्यर्थ गंवाओ

कल क्या होगा कल देखेंगे

जीवन चिंता मुक्त बिताओ


चिंता और चिता में केवल

एक बिंदु का ही तो है अंतर

चिंता करकर कर लेता तू

अपने जीवन संग षड्यंत्र


चिंता में ना करो समय बर्बाद

चिंतन करो और रहो आबाद

आज जो पल मिला है तुमको

उसकी उस पल खुशी मनाओ


ना निराश हो न हताश हो

निरन्तर पथ पर बढ़ते जाओ

कल क्या होगा कल देखेंगे

जीवन चिंता मुक्त बिताओ


व्यर्थ की चिंता को तुम त्यागो

मुसकुराते घर को वापिस आओ

कल क्या होगा कल देखेंगे

जीवन चिंता मुक्त बिताओ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract