STORYMIRROR

ritesh deo

Abstract

4  

ritesh deo

Abstract

जिंदगी

जिंदगी

1 min
411


जिंदगी

सुबह का इंतजार

 करती है


रात

इसीलिए तो

जरूर ढलती है


बहुत किये

लोगों ने


रात में

रोशनी के उपाय


जिंदगी

क्यों 

अब भी

टिमटिमाती हुई

जलती है


तुम्हारे धोखे के

भरम में

न आयेंगे हम


लगाई आग में

न जल पायेंगे हम


जिंदगी

एक

बहती नदी 

का नाम है


संभल रहना

शैतानियत सारी

बहा ले जायेंगे हम


दिलोदिमाग में

घुमड़ रहे बादल


घने स्वार्थ के

जंगल में

छिप


कौन करता है

छल


जिंदगी

गरजते बादलों का भी नाम है


बिजली गिरेगी


बदलेगी तस्वीर--

---बात बिल्कुल साफ है


-


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract