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Madhu Gupta "अपराजिता"

Classics Inspirational

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Madhu Gupta "अपराजिता"

Classics Inspirational

विवाह "

विवाह "

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स्वार्णिम सुखद साथ है विवाह सात ये फेरों का 

जीवन भर सात निभाओगे इसका तुम प्रणय करो

विश्वास विवाह की पहली परिभाषा

इसे हिय से अंगीकार करो


 दो गोत्रों की रजामंदी का 

मिलन आनुठा संस्कार करो

विवाह एक मर्यादित शब्द हैं

सीमा में इसको स्वीकार करो


रिश्ता ये है कांच के जैसा 

पारदर्शिता इसकी अमित पहचान करो

गिरजा गणेश साक्षी इस बंधन के

हृदय से इसका सम्मान करो


एक बिना दूजा रहता है अधुरा

इस बात से ना इंकार करो

सारे रिश्ते इस से होकर गुजरते 

इसका मिलकर तुम आभास करो


विवाह पवित्र, पावन और पूर्ण रिश्ता है

इसे तोड़ने का कभी ना दिल में अरमान करो।।


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