तू चल
तू चल
न अटक, न तू भटक,
लक्ष्य पर रख नज़र।
शूल चुभते हैं तो क्या,
कदम बढ़ा अपनी डगर।।
तपती क्यों न हो दुपहरी,
चाहे कंपकंपाती रात हो।
वीर तो है केवल वह ही,
ध्येय जिसके साथ हो।।
जो कभी डर सकता नहीं,
शूलों से रुक सकता नहीं।
अदम्य साहस का संग ले,
अटल राही केवल वह ही।।
लाख विपदा रोके कदम,
पर धैर्य न हो कभी कम।
हर विपदा कर पराजित,
विजयी होता हैं वह ही।।
रेत सा कण वो कभी नहीं,
तूफानों से जो आक्रांत हो।
अटल रहती जिसकी चाल,
हिमालय सी सदा शान हो।
बनो सदा तुम ऐसे सेनानी,
विपदाओं से जो न डरे।
संघर्षों से भी सीख लेकर,
भविष्य सजाये जो सुनहरे।।
