तुम भी बेवफ़ा निकली...!
तुम भी बेवफ़ा निकली...!
दस साल कि दोस्ती का ये कैसा सिला दिया...
एक छोटी सी ख़ता क्या हुई,
हमेशा के लिए भुला दिया...
मेरे यार कहते थे कि ये लड़कियां दिल तोड़ने कि मशीन होती है...
मैंने उनकी एक भी ना सुनी...
मगर आज कोसता हूँ अपने आप को...
तुमने इस क़दर दिल तोड़ दिया...
भरोसा नहीं होता ख़ुद पर...
सच में यार तुम भी बेवफ़ा निकली...!
ज़ब तुम रूठती थी मुझसे,
तो मैं नाराज़ नहीं होता था बल्कि ख़ुशी होती थी...
जानती हो क्यूँ...
नहीं ना तो सुनो...
तुम्हारी नाराज़गी में भी बेशुमार प्यार झलकता था मुझे...
ऐसा लगता था कि तुम्हारे प्यार करने का अंदाज ही ऐसा है...
आज फ़िर ज़ब तुम मुझसे नाराज़ हुई, तो कुछ पल तो ऐसा लगा कि हमारी मोहब्बत शायद औऱ बढ़ गई है...
कहाँ पता था कि तुम दुबारा मुड़के नहीं देखोगी...
तुम्हारा इस तरह अचानक से बदल जाना...
भरोसा नहीं होता ख़ुद पर...
सच में यार तुम भी बेवफ़ा निकली...!
