STORYMIRROR

Sonam Kewat

Romance Tragedy

3  

Sonam Kewat

Romance Tragedy

क्या तुझे फर्क नहीं पड़ता

क्या तुझे फर्क नहीं पड़ता

1 min
189

जिंदगी जी रहा हूँ पर आजकल

बिना बात किसी से नहीं झगड़ता

तुम्हें मुस्कुराते देख सोचता हूं कि

क्या तुझे सच में फर्क नहीं पड़ता 


लगता है तू भूल गई है कि कैसे

हम सुबह साथ में चाय पीते थे 

या फिर वो सारे पल जब हम

एक दूसरों को देखकर जीते थे 


या शायद तुम भूल गए हो कि 

मैं किसी का हाथ पकड़कर नहीं चलता 

बस अब इतना ही बता दे कि

क्या तुझे सच में फर्क नहीं पड़ता 


वैसे तू उसके साथ रहती तो है पर 

साथ कभी भी लगती नहीं है 

मेरी आँखों में आँखें मिलाकर कह दे

तुझे मेरी कमी महसूस होती नहीं है 


अगर कोई मजबूरी है तो बता दे 

साथ मिलकर सब कुछ झेलेंगे

हम बड़े हो गए हैं तो क्या हुआ

पहले जैसे बच्चों की तरह खेलेंगे 


समझ नहीं आता अचानक से 

तेरा यूं चले जाना सही था क्या 

तेरे मुसीबत इतनी बड़ी थी कि 

मैं तेरे काबिल नहीं था क्या 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance