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Sonam Kewat

Tragedy

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Sonam Kewat

Tragedy

क्या बीती होगी

क्या बीती होगी

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कितना मजबूर होता होगा कोई,

जब खुद के हाथों खुद की जान लेनी पड़ती होगी,

कुछ ना कर पाया होगा जब रूह उसकी तड़पती होगी।

वो भी चाहता होगा कि कोई पास बैठकर उसके अंदरूनी दर्द का साथ साझा कर ले,

वह भी ढूंढता होगा किसी को जो उसे मुसीबत से निकलने का वादा कर ले।

ढूंढा होगा इर्द-गिर्द लोगों को, पर अपनों में गैरों को पाया होगा।

क्या बीती होगी उसपर जब आखिरी बार परिवार वालों से आंख मिलाया होगा।

कहना तो बहुत कुछ चाहता होगा, पर सोचा होगा शायद कोई उसे समझेगा नहीं,

बहुत से उझलाने होंगे उसके सामने, पर जाकर भी वह इस बार समझेगा नहीं।

इसी कशमकश में लटकाया रस्सी को और बोला, "बस अब बहुत हो गया",

कसकर रस्सी को लगाया गले पर, और देखते ही देखते मां का एक लाल खो गया।

अब जाकर सोचते हैं घर वाले कि काश एक बार बैठकर बात किया होता,

अगर समय रहते संभाल लिया होता तो शायद यह सब कुछ ना हुआ होता।

तुम भी सोचो क्या कर सकते हो ऐसे हालात में,

क्योंकि हर कोई घुट-घुट कर मर रहा है,

मुस्कुराते होठों को जरा गौर से देखो, ग़म वाली आंखों में भी आंसू बह रहा है।

तय कर लो कि जहां जाएंगे खुशियां फैलाएंगे,

ग़म नहीं लेंगे, पर खुशियां उधार रख कर आएंगे।

सच कहूं तो यही है जीवन जीने का सही तरीका,

इस पल को जियो, खुलकर जियो और बेबाक जिओ,

क्योंकि एक दिन हम सब मर जाएंगे, जी भर के जी लो,

क्योंकि यह लौट कर नहीं आएंगे।


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