अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा
Tragedy
राहों का अंजाना,
मोहब्बत का दीवाना।
चाहत का फसाना,
न इलाज न दवाखाना।
वादे झूठे कसमें झूठी,
बेवफाई मशहूर किस्सा,
पतवार टूटी हाथ से छूटी,
गम-ए-सैलाब मांझी डूबा।
इश्क के दरिया में,
कोई नाम नहीं,
गम के सिवा,
कोई ईनाम नहीं।
इत्तफाक जिंदग...
कान्हा
सर्द हवाएं
कभी ख़ुश तो कभ...
मेरा ग़म
मां-बाप के अपनी नजरों के देखे सपने होते हैं. मां-बाप के अपनी नजरों के देखे सपने होते हैं.
मैं जीवन दीप तुम्हारे लिए टीम टीम जलता I मैं जीवन दीप तुम्हारे लिए टीम टीम जलता I
आंसुओं की धार, सांसों की तार पर इसके अपना पैर रखा आंसुओं की धार, सांसों की तार पर इसके अपना पैर रखा
कुछ ऐसा कर जाऊँ जिन्दगी में जिससे की दुनिया में मेरा नाम हो। कुछ ऐसा कर जाऊँ जिन्दगी में जिससे की दुनिया में मेरा नाम हो।
सिर्फ अबला बन रह जाती हूं,कोई तो बताए मुझे क्यों मैं स्त्री होकर भी एक सशक्त स्त्री सिर्फ अबला बन रह जाती हूं,कोई तो बताए मुझे क्यों मैं स्त्री होकर भी एक सश...
होड़ लगी है कितना का कितना हसोत लें। होड़ लगी है कितना का कितना हसोत लें।
उस रोज़ हमारे मुल्क में हालात कुछ ठीक न थे, चारों ओर बस दंगे और झुलसते मकान थे।। उस रोज़ हमारे मुल्क में हालात कुछ ठीक न थे, चारों ओर बस दंगे और झुलसते मकान ...
किसी विपदा, दुख या त्रासदी में पूरे मनोयोग से। किसी विपदा, दुख या त्रासदी में पूरे मनोयोग से।
इतनी सुन्दर सृष्टि के साथ तू खेला है सृष्टि ने युगों युगों से तुझको झेला है इतनी सुन्दर सृष्टि के साथ तू खेला है सृष्टि ने युगों युगों से तुझको झेला है
तू बरस जा ए सनम आज़म पे शबनम की तरह। तू बरस जा ए सनम आज़म पे शबनम की तरह।
अंगारे से पटे किनारे पर लाकर टिकाना। अंगारे से पटे किनारे पर लाकर टिकाना।
दिलासे भी दिल से कहाँ लगते, बता ना क्या करते लौट कर चले आये भला क्या करते। दिलासे भी दिल से कहाँ लगते, बता ना क्या करते लौट कर चले आये भला क्या करते।
क्या उसको कभी मेरी अब याद नहीं आती। क्या उसको कभी मेरी अब याद नहीं आती।
जज्बातों को रौंधते हुए पल में बदलते मुकद्दर देख लिए। जज्बातों को रौंधते हुए पल में बदलते मुकद्दर देख लिए।
इंसानियत के नाते ही सही इक बार इसका सलाम तो ले ले। इंसानियत के नाते ही सही इक बार इसका सलाम तो ले ले।
तेरी उलफ़त में बुराई तो नहीं माँगी थी ! तेरी उलफ़त में बुराई तो नहीं माँगी थी !
तुम भिक्षुक से थे मैं दाता सी लगती थी तुम्हें, कितने मनुहार पर पाया मुझे.. तुम भिक्षुक से थे मैं दाता सी लगती थी तुम्हें, कितने मनुहार पर पाया मुझे..
ऐसा भी होगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा। ऐसा भी होगा शायद किसी ने सोचा भी न होगा।
माँ कहती थी ! सुबह का सपना !! सच होता है ..... माँ कहती थी ! सुबह का सपना !! सच होता है .....
जब कोई सो नहीं पाता है कई दिन और रात तो सोचो कैसा लगता है, जब कोई सो नहीं पाता है कई दिन और रात तो सोचो कैसा लगता है,