STORYMIRROR

Sonam Kewat

Tragedy Classics Fantasy

4  

Sonam Kewat

Tragedy Classics Fantasy

मुझे ख्वाबों में ही रहने दो

मुझे ख्वाबों में ही रहने दो

1 min
10

वह मेरा हो या ना हो 

मुझे उसका ही होने दो 


मेरे होने ना होने का फर्क कहां 

पर मुझे खुद को उसमें खोने दो 


जो हकीकत में ना कहा कभी 

बस ख्वाबों में ही कहने दो 


मजबूत नहीं ख्वाबों का महल 

इसे यूं रेत का ही रहने दो 


सुनते रह गई बातें सबकी 

अब खुद बातें भी कहने दो


पर मन भी नहीं हैं बातें कह डालूं 

तो बातों को दबा ही रहने दो 


अब नहीं चाहिए कोई सामने अपने 

मुझे लोगों से दूर ही रहने दो 


मैं हकीकत से डरती हूं 

मुझे ख्वाबों में ही रहने दो



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy