नामर्द
नामर्द
नामर्द ये कोई गाली नहीं है
बल्कि ये मर्दों द्वारा बनाया गया आईना है
शायद ये आईना तभी सच दिखाता है,
जब एक मर्द दूसरे मर्द को दिखाता है
क्योंकि अगर औरत आईना दिखाने लग जाए
तो मर्दों को नामर्द शब्द भी गाली लगने लग जाता है
समाज में जब कोई मर्द किसी दूसरे मर्द को नामर्द कहता है
तो ये बात मजाक बनकर रह जाती है,
पर अगर किसी औरत ने कह दिया
तो समझो नामर्द शब्द ही गाली बनकर चुभ जाता है
मेरे हिसाब से किसी मर्द को नामर्द कहना
महाभारत की शुरुआत करने जैसा लगता है
हां क्योंकि कुछ मर्दों को यह लगता है
कि बच्चा पैदा ना करने की काबिलियत ही
किसी मर्द को नामर्द बनाती है, पर नहीं! नहीं ऐसा नहीं है
मर्द तब नामर्द है....
जब मर्द अपने आसपास की औरत को खुद ही से महफूज नहीं रख पाता
जब वो खुद की जिम्मेदारियों को किसी और पर टाल देता है
जब वो सोच छोटी रखने में और नाम ऊँचा करने पर ध्यान देता है
जब वो सिर्फ अपनी माँ-बहन की इज्जत कर बाकी माँ-बहन की गाली पर ताली बजाता है
जब वो बीवी के गुलाम पर शर्मिंदा हो और समाज का गुलाम बनने पर इतराता है
वो मर्द नहीं नामर्द है
जो अपनी मर्दानगी से किसी की कमजोरियों का फायदा उठाता है
हां, मैं शायद सब कुछ नहीं जानती
पर इतना जरूर जानती हूँ
कि इस नामर्द के आईने में अपना चेहरा देखकर
जो खुद से आँख मिलाने के काबिल बन जाए
वो नामर्द नहीं बल्कि मर्द कहलाता है
