खामोशी
खामोशी
खामोशी में मोहब्बत नहीं होती
खामोशी में एहसास नहीं होता
खामोशी कोई कहानी नहीं कहती
खामोशी में कोई कभी बात नहीं होती
खामोशी की कोई अलग जुबान नहीं होती
खामोशी बस खामोशी होती है
खामोशी का मायना बदल जाता है
ये जानने के बाद कि,
ये खामोशी किसी अकेले शख्स की है
या फिर दो शख्स के बीच की खामोशी है
अगर अकेला इंसान खामोश है तो फिर
खामोशी बस खामोशी ही होती है
पर अगर खामोशी दो शख्स के बीच हो
तो खामोशी एक जख्म बन जाती है
अगर एक बोले और दूसरा खामोश रहे
तो खामोशी एकतरफा किस्सा बनाती है
पर अगर जहां बात करना है
वहां पर भी दो लोग खामोश हैं
तो फिर ये खामोशी भी
जिंदगी का हिस्सा बन जाती है
