STORYMIRROR

praveen ohdar

Tragedy

3  

praveen ohdar

Tragedy

इंतजार

इंतजार

1 min
245

आज फिर एक 

खबर यूं आई है

किसी के दर से

दर्द की बू आई है


जाना जिन्हें था दूर मंजूर

एक आह ! लफ्ज़ गुनगुनाई है

मौका मिलेगा साकी तुझे भी 

बेवक्त ....... किसे आज तक आई है

यादों के काफिले ही तो


तेरी दर्द की दवाई है

यूँ आएंगे वो इस कदर 

जिनके गम में

ये दर्द पाई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy