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टूटा चाँद

टूटा चाँद

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तेरे लिये एक चाँद ढूंढा था

जो टूटा निकला

एक सितारा भी खोजा था

वो छोटा निकला,


वादे जो किये थे तुझसे

झूठे साबित हो चुके,

कभी यह ना कहना सिक्का

ये तो खोटा निकला।


तू कुछ भी बोल तेरी मर्जी

मंजूर कर लूँगा

तेरा हर गिला शिकवा

कुबूल कर लूँगा,


रूठने मनाने का खेल

पुराना हो गया अब

तेज़ गरम चाय की जलन भी

होठों पे आजमा लूँगा।


जानता हूँ जलन से ज्यादा

तू भी जलती होगी

सोने की बहाना करती होगी

नींदों को छलती होगी।


खुली आँखों से धुंधली सी

दिखे जो तस्वीर,

बन्द पलकों से छटा उसकी

महसुस करनी होगी।


सूरज में जलन कितनी ज्यादा

चाँद भी जानता है

फिर भी ठंडी लहर से भीगा

किरणें बुनता है।


छाछ से जख्मी हुए होठ हैं ये

जवाब कैसे देंगे

सावन की बूंदें बेरहम अक्सर

अगन लगाती हैं।


समंदर के अंदर समायी हुई

नमकीन की तरह,

बादलों के काफ़िलों में शामिल

बूंद आब की तरह।


नस नस में मेरी बस जाओ

इनायत हो अगर,

आओ बैठें आस पास एक बार

शिकवा सुलह की तरह।।


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