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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract Classics

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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract Classics

मतलब के मुताबिक

मतलब के मुताबिक

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जिनके मतलब के मुताबिक मैं नहीं निकला
वो छोड़ चलदिए उधर मैं इधर चल निकला ।।

 फासलें बढ़ी तो क्या नज़दीकी होगी तो कहीं
जिसे खोजते नहीं हैं वो , उसे ढूंढने मैं निकला।।

 हर सवाल पे बवाल , करना आदत है उनकी बवालों के बीच मैं चला , हल ढूंढने निकला ।।

 जंग जारी है हर तरफ , जल , थल , नभ में भी जुबानी जंग बेमतलब , आज संसद से निकला ।।

 लाख सीखाया कौए को , कुछ तो मधुर बोलो जो भी बोली वो बोला , स्वर कर्कश ही निकला ।।

 मल हो या फिर मैल , शरीर का दुश्मन है दोनों रिश्ता रखना तो होगा , सोचते हुए मै निकला ।। ***********************************


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