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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract

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Dr Baman Chandra Dixit

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रिश्ता तुम्हारा मेरा

रिश्ता तुम्हारा मेरा

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रिश्ता तुम्हारा मेरा उस चांद के तरह
 बिखेरती रोशनी नित चांदनी की तरह ।।

 कुछ मैल सी जमी हुई चेहरे पे उसकी
लगता नहीं है वो काँच, आईने के तरह ।।

 पानी की किल्लत यहां प्यास बुझेगी नहीं
 पी जा आँसुओं को अपनी पानी की तरह ।।

दिल में लगी है चोट जल्दि भरेगी नहीं
मरहम करने से क्या आम ज़ख्मों की तरह ।।

 हवाओं की हवेली में साँसें कैद हैं पड़े
 वसंत में पतझड़ का शिकार पेड़ की तरह ।।

 उस पेड़ के ओट , वक्त कुछ बाकी है अब भी खुदको ढाल लो वर्ना ढल जावेगी वक्त के तरह ।। **^**^**^**^**^**^**^**^**^**^**^   


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