टास्क 2 (सोनेट) प्यार
टास्क 2 (सोनेट) प्यार
बुझती शमा से चराग़ जलाओ तो कोई बात बने,
बंद पलकों से नज़रें मिलाओ तो कोई बात बने।
प्यार के बदले नफ़रतें तो ज़िंदगी में की होंगी बहुत,
नफ़रतें प्यार के दामन में छिपाओ तो कोई बात बने।
आँसू जो शबनम की तरह जमीं पे गिरे तो फूल बने,
कभी पत्थर पर फूल खिलाओ तो कोई बात बने।
चाँदनी रातों में सितारों से चूनर सजाई होगी बहुत,
शमा की लाली से सिन्दूर सजाओ तो कोई बात बने।
क्या? इतराया सतरंगी इन्द्रधनुष पर नीला असमान,
कभी ढलती शाम में सूरज उगाओ तो कोई बात बने।
ज़िंदगी के सफ़र में मंज़िल तक तो पहुँचे होंगे बहुत,
भंवर में फँसी कश्ती किनारे लगाओ तो कोई बात बने।
ओढ़ कर बैठे रहे प्यार को सपनों में अब तक 'शील',
ज़िन्दगी में भी शक्कर सा घुलाओ तो कोई बात बने।

